Supreme Court Patted Rajasthan Back: राजस्थान सरकार ने पुलिस थानों की कार्रवाई में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में राजस्थान सरकार का एक कदम बेहद कारगर साबित हुआ है. इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट से शाबाशी मिली है. दरअसल, राजस्थान के पुलिस थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए एक 'मॉडल राज्य' के रूप में पेश किया है. अदालत ने अन्य राज्यों को इसे सहराहनीय कदम को देखते हुए अन्य राज्य को भी इस सफल ढांचे और योजना का अपने यहां पालन करने के आदेश दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने साल 2021 के 'परमवीर सिंह सैनी' मामले के निर्देशों के अनुपालन को लेकर सुनवाई की. राजस्थान की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पैरवी की, जिसमें उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने पुलिस थानों की निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 75.12 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर किया है. जिसके तहत अब हर थाने में कैमरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 16 करने के फैसला किया है.
आंकड़ों में राजस्थान की स्थिति
कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान का प्रदर्शन इस योजना को लेकर अब तक शानदार रहा है. इसके तहत प्रदेश के कुल पुलिस थाने 1,050 में से 915 थानों में CCTV लगाए जा चुके है. शेष बचे 135 थानों में अभी यह प्रक्रिया जारी है. नए मानक के हिसाब से हर थाने में कम से कम 16 कैमरे लगाए जाएंगे.
एमिकस क्यूरीए ने दी शाबाशी
अदालत के जरिए इस योजना की निगरानी करने के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरीए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने योजना की कार्यप्रगति को देखते हुए राजस्थान के मॉडल की जमकर तारीफ की. उन्होंने न्यायालय से कहा कि राजस्थान ने जिस तरह से बजटिंग, प्लानिंग और क्रियान्वयन किया है, वह प्रशंसनीय योग्य है. उन्होंने सुझाव दिया कि देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को राजस्थान के इसी 'अनुपालन ढांचे' को अपनाना चाहिए.
21 फरवरी को होगी देशव्यापी समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय को लेकर देश के सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव को निर्देश दिया है कि आगामी 21 फरवरी को इसपर वर्चुअल कॉन्फ्रेंस करें. जिसमें राजस्थान के मॉडल को आधार बनाकर चर्चा होगी साथ ही अपने अपने यहां लगाू करने का खाका भी बनाने की बात रखी जाएगी. साथ ही अपने बात को जोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल कैमरे लगाना काफी नहीं है. डेटा की सुरक्षा और निगरानी भी जरुरी है इसके लिए हर राज्य में एक 'केंद्रीकृत सर्वर प्रणाली' होनी चाहिए, जो सभी थानों के कैमरे को सीधे हेडक्वार्टर से जोड़ेंगे, जिससे डेटा से छेड़छाड़ की संभावना खत्म होगी.