22 साल से खड़े-खड़े सो रहे हैं ये संत, अब मां वैष्णो के दरबार के लिए शुरू की 850 KM कनक दंडवत यात्रा

सीकर के खड़ेश्वर बाबा पिछले 22 वर्षों से खड़े रहकर लगातार तपस्या कर रहे हैं. अब उन्होंने माता वैष्णो देवी तक 850 किमी की कनक दंडवत यात्रा शुरू की है.

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Khadeshwar Baba Dandwat Yatra
NDTV

आस्था, अटूट विश्वास और कठिन साधना की एक ऐसी मिसाल  राजस्थान के सीकर जिले से सामने आई है. जिसे देखकर हर कोई हैरान है. जिले के दांतारामगढ़ तहसील के बाय गांव के प्रसिद्ध संत शंकर दास महाराज, जिन्हें श्रद्धालु श्रद्धा से 'खड़ेश्वर बाबा' के नाम से पुकारते हैं, ने मानव कल्याण और विश्व शांति का संदेश लेकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान के बाद माता वैष्णो देवी धाम तक की बेहद कठिन कनक दंडवत यात्रा शुरू कर दी है. करीब 850 किलोमीटर लंबी इस यात्रा की शुरुआत निर्जला एकादशी के अवसर पर 25 जून को बाय गांव स्थित उनके आश्रम से हुई.

22 सालों से बिना बैठे-लेटे कर रहे हैं साधना

75 साल के खड़ेश्वर बाबा यह कठिन यात्रा जमीन पर दंडवत करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. उनके साथ चल रहे ग्रामीण सड़क पर गद्दे बिछाते जाते है, जिन पर लेटकर बाबा हर दंडवत पूरा कर आगे बढ़ते हैं. बाबा अपने साथ लाल कपड़े में बंधा एक नारियल भी लेकर चल रहे हैं, जिसे वे कटरा स्थित माता वैष्णो देवी के दरबार  में अर्पित करेंगे.

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खड़ेश्वर बाबा के अनुसार, उनकी इस यात्रा की कोई तय समय-सीमा नहीं है. यात्रा के दौरान वे खाटूश्यामजी सहित रास्ते में आने वाले प्रमुख मंदिरों और सिद्धपीठों में दर्शन-पूजन करते हुए आगे बढ़ेंगे. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब होते हुए जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने वाली इस यात्रा में वे भजन-कीर्तन के माध्यम से सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार भी करेंगे. बाबा के अनुसार, उनकी यह यात्रा मानव कल्याण, विश्व शांति और गौ संरक्षण के संदेश को लेकर समर्पित है. 

बिना लेटे लगातार खड़े होकर कर रहे है साधना

 श्रद्धालुओं के अनुसार खड़ेश्वर बाबा पिछले 22 वर्षों से बिना बैठे और बिना लेटे लगातार खड़े रहकर साधना कर रहे हैं. सोते समय भी वे विशेष सहारे के जरिए खड़े-खड़े ही विश्राम करते हैं, जिससे उनकी तपस्या लोगों के बीच आस्था और श्रद्धा का विषय बनी हुई है.

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