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This Article is From Feb 24, 2026

Rajasthan: बांदीकुई में 35 साल बाद लौटा 'भाप का इंजन', तमिलनाडु से 2500 KM चलकर पहुंची 'रेल नगरी' की शान

दौसा के बांदीकुई रेल नगरी के रेल इतिहास से जुड़ी खास सौगात शहर को मिलने जा रही है. बांदीकुई जंक्शन ब्रिटिश काल में “रेल नगरी” के नाम से प्रसिद्ध बांदीकुई जंक्शन का पुराना वैभव एक बार फिर लौटता नजर आ रहा है.

Rajasthan: बांदीकुई में 35 साल बाद लौटा 'भाप का इंजन', तमिलनाडु से 2500 KM चलकर पहुंची 'रेल नगरी' की शान
Bandikui Steam Engine
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Dusa News: दौसा के बांदीकुई रेल नगरी के रेल इतिहास से जुड़ी खास सौगात शहर को मिलने जा रही है. बांदीकुई जंक्शन ब्रिटिश काल में “रेल नगरी” के नाम से प्रसिद्ध बांदीकुई जंक्शन का पुराना वैभव एक बार फिर लौटता नजर आ रहा है. दक्षिण रेलवे की गोल्डन रॉक वर्कशॉप, तिरूचिरापल्ली (तमिलनाडु) से नैरो गेज क्लास-B का 11.43 टन वजनी विंटेज स्टीम इंजन बांदीकुई पहुंचा है.

रेल नगरी' में फिर हुई भाप के इंजन की वापसी

बांदीकुई में करीब साढ़े तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद, 'रेल नगरी' में फिर से भाप के इंजन की वापसी हुई है. तमिलनाडु के तिरूचिरापल्ली से निकला यह 11 टन वजनी ऐतिहासिक विंटेज स्टीम इंजन, 11 दिनों के लंबे सफर के बाद ट्रेलर के जरिए बांदीकुई पहुंचा है. इस उपलब्धि के पीछे क्षेत्रीय विधायक भागचंद टांकड़ा के विशेष प्रयास रहे हैं, जिन्होंने रेल मंत्री से इस विरासत को सहेजने और बांदीकुई के पुराने वैभव को लौटाने की पुरजोर मांग की थी. अब इस ऐतिहासिक इंजन को बांदीकुई जंक्शन के बाहर, जीआरपी थाने के सामने एक विशेष प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जा रहा है.

पहली राजपूताना ट्रेन बांदीकुई तक चली थी

इतिहास में ऐसा लिखा है कि राजस्थान की पहली राजपूताना ट्रेन 1874 में आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से बांदीकुई तक चली थी. बांदीकुई ब्रिटिश काल से ही एक रेल शहर रहा है, और यह विंटेज इंजन उस शान को फिर से जगाएगा.

2025 का बैच लगाकर गया है भेजा

 रेलवे विभाग के अफसर ने बताया कि भाप के इस इंजन के पहुंचे से पहले जीआरपी थाना पुलिस के पास ही एक प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है.जिसपर इस स्टीम नैरो गेज के भाप के इंजन को रखा जाएगा. इस इंजन को नया पेंट कर वर्ष 2025 का बैच लगाकर भेजा गया है.इसमें रात के समय लाइटिंग भी जलेगी

 2000 से अधिक  लोग रिपेयरिंग सर्विसिंग में करते थे काम

बता दें कि भाप के इंजन की रिपेयरिंग सर्विसिंग बांदीकुई जंक्शन में लोको शैड में हुआ करती थी. करीब 35 वर्षों पहले बांदीकुई लोको शैड  में करीब 2000 से अधिक कार्मिक काम किया करते थे.  रेल से जुड़े इतिहास आज भी इस बांदीकुई से  रेल नगरी से जुड़े हैं.
 

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