Rajasthan: जोजरी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का राजस्थान सरकार को अल्टीमेटम, टाली CBI जांच, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई के दिए आदेश

Rajasthan News: राजस्थान की लूनी-जोजरी नदी में अवैध रूप से केमिकल बहाने वाली 4 किलोमीटर लंबी छिपी पाइपलाइन मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे राजस्थान सरकार कोसख्त कार्रवाई के आदेश दिए है.

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Jojari River Pollution

 SC Warning on Jojari River: राजस्थान की जोजरी-बांडी-लूनी नदी प्रणाली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया है. न्यायालय द्वारा गठित एक विशेष समिति को जोधपुर के निकट जोजरी नदी में बिना उपचारित (Unprocessed) औद्योगिक कचरा और रासायनिक पानी बहाने वाली लगभग 4 किलोमीटर लंबी एक गुप्त भूमिगत पाइपलाइन मिली है. इस खुलासे के बाद सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उच्च न्यायलय ने सख्ती दिखाते हुए सीबीआई के हाथ जांच ने सौंपते हुए  राजस्थान सरकार को  सख्त कार्रवाई के आदेश दिए है.

 सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी, "अधिकारी क्या सो रहे थे?"

मामले की गंभीरता को देखते हुए   जज विक्रम नाथ एवं जज संदीप मेहता ने पीठ ने अधिकारियों की प्रणालियों पर कई सवाल उठाए. पीठ ने पूछा कि इतनी बड़ी और लंबी भूमिगत डिस्चार्ज प्रणाली सीईटीपी संचालकों, उद्योगों और नियामक एजेंसियों की नाक के नीचे बीना जानकारी के कैसे संचालित हो रही थी? कोर्ट ने तल्ख लहतजे में कहा कि जब नदी की लगातार निगरानी की जा रही थी, तब स्थानीय अधिकारी क्या कर रहे थे? सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने राजस्थान में पर्यावरण की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से जारी न्यायिक हस्तक्षेप के बावजूद ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है.

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सरकार का एक्शन में 306 उद्योग और CETP बंद, दो अधिकारी सस्पेंड

वही मामले को लेकर कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से उपस्थित राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ीं राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने अदालत को सरकार द्वारा उठाए गए त्वरित कदमों की जानकारी दी. 

सरकार द्वारा की गई मुख्य कार्रवाइयां

उन्होंने बताया कि 27 मई को समिति के निरीक्षण के दौरान अवैध डिस्चार्ज का मामला सामने आते ही कठोर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. जयपुर से विशेष टीम तत्काल जोधपुर भेजी गई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया, वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया गया, आपराधिक कार्रवाई प्रारंभ करने के साथ ही पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

साथ ही जोधपुर सीईटीपी से जुड़े सभी 306 वस्त्र उद्योगों को तुरंत बंद कर दिया गया है तथा स्वयं सीईटीपी को भी जांच और सुधारात्मक कार्रवाई पूरी होने तक बंद रखा गया है.

SIT का गठन का होगा गठना

अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी तथा एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाएगा, जो उद्योगों, सीईटीपी प्रबंधन और सरकारी अधिकारियों की भूमिका सहित पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा. 

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बाल-बाल बची सरकार, टली CBI जांच

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस घोर लापरवाही को देखते हुए वह पहले मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने पर विचार कर रहा था. हालांकि, राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्र एसआईटी जांच और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के कड़े आश्वासन के बाद कोर्ट ने फिलहाल सीबीआई जांच के फैसले को टाल दिया है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी व्यक्ति इसमें शामिल है, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए.

 मानसून से पहले 'विषाक्त कीचड़' हटाने की चेतावनी

न्यायालय नियुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि जोजरी-बांडी-लूनी नदी तंत्र के तल में भारी मात्रा में जहरीला स्लज (विषाक्त कीचड़) जमा हो चुका है। यदि आगामी मानसून से पहले इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो यह जहर कृषि भूमि, भूजल और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में फैल जाएगा, जिससे मानव जीवन और मवेशियों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सतत निगरानी में है और जल्द ही विस्तृत आदेश जारी होने की संभावना है.

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