टी-2408 रणथंभौर से मुकुंदरा में किया गया शिफ्ट, अब तक करीब 24 टाइगर की हो चुकी है शिफ्टिंग

खंडार क्षेत्र के नॉन ट्यूरिज्म जोन लाहपुर से बाघ को ट्रेंकुलाइज किया गया. इसके बाद टी-2408 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा) में शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हुई.

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Sawai Madhopur News: सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में टाइगर टी-2408 को ट्रेंकुलाइज किया गया. वन विभाग की टीम ने खंडार क्षेत्र के नॉन ट्यूरिज्म जोन लाहपुर से बाघ को ट्रेंकुलाइज किया. दरअसल, बाघिन टी-93 के शावक टी-2408 को मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (कोटा) में शिफ्टिंग किया जाना था. एनटीसीए की अनुमति मिलने के बाद बाघ की शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू की गई. वन विभाग की टीम टाइगर को लेकर मुकुन्दरा के लिए रवाना हो गई. इस दौरान मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और पशु कल्याण के दिशा-निर्देशों का खास ख्याल रखा गया.

आज सुबह ट्रेंकुलाइज करने के लिए जुटी टीम

इसे राज्य में बाघ संरक्षण एवं प्रबंधन के तहत एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है. यह कार्रवाई आज (9 जनवरी) सुबह रणथंभौर टाइगर रिज़र्व के लाहपुर क्षेत्र में की गई. बाघ टी-2408 को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज किया गया. 

रणथंभौर के बाघों को अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट करने से ही आज प्रदेश में बाघों की संख्या 150 के करीब पहुंची है. अकेले रणथंभौर में इसकी आधी आबादी है. यहां से अन्य टाइगर रिजर्व में अब तक करीब 24 बाघ-बाघिन शिफ्ट किए जा चुके हैं. हालांकि उनमें से अब तक 13 की मौत हो चुकी है. लेकिन रणथंभौर के बाघों की बदौलत ही आज प्रदेश में बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है.

मुकुंदरा में बाघ के मूवमेंट पर रखी जाएगी नजर

इस शिफ्टिंग का उद्देश्य रणथंभौर पर बाघों के बढ़ते दबाव को कम करना, नए क्षेत्र में बाघ आबादी को सुदृढ़ करना और आनुवंशिक विविधता बनाए रखना है. बाघ के स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी की जा रही है और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व में छोड़ने के बाद भी उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी. वन विभाग, पशु चिकित्सकों, और लॉजिस्टिक स्टाफ के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक अभियान पूरा किया गया.

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