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जालोर CMHO घोटाला: 7 रुपये की किट 25 में खरीदी, मैन्युफैक्चरिंग से पहले की तारीख में सप्लाई, जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

रिकॉर्ड में प्रेग्नेंसी किट की सप्लाई 31 मार्च 2025 दिखाई गई. हैरानी की बात यह है कि उन किट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट मई 2025 अंकित है.

जालोर CMHO घोटाला: 7 रुपये की किट 25 में खरीदी, मैन्युफैक्चरिंग से पहले की तारीख में सप्लाई, जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
जालोर चिकित्सा विभाग में खरीद घोटाला: जांच रिपोर्ट में CMHO डॉ. भैराराम जाणी समेत 5 अधिकारी दोषी करार
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के चिकित्सा विभाग में नियमों को ताक पर रखकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है. जालोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट (Pregnancy Test Kit) और अन्य मेडिकल डिवाइस की खरीद में करीब 50 लाख रुपये के घोटाले (Scam) का पर्दाफाश हुआ है. आरटीआई (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट (Departmental Inquiry Committee Report) ने इस भ्रष्टाचार की कलई खोल दी है.

तीन गुना दाम पर खरीद

दस्तावेजों के अनुसार, सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने अजमेर की एक चहेती फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए बाजार दर से 200% से 300% अधिक कीमत पर उपकरण खरीदे.

  • प्रेग्नेंसी टेस्ट किट: बाजार कीमत 7 रुपये, खरीदी गई 25 रुपये में.
  • हीमोग्लोबिन मीटर: कीमत 10,000 रुपये, भुगतान किया गया 28,000 रुपये.
  • ग्लूकोमीटर: कीमत 3,750 रुपये, खरीद हुई 9,500 रुपये में.

तारीखों का खेल, 'टाइम ट्रेवल' वाली सप्लाई

घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग डेट में हेराफेरी है. रिकॉर्ड में प्रेग्नेंसी किट की सप्लाई 31 मार्च 2025 दिखाई गई. हैरानी की बात यह है कि उन किट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट मई 2025 अंकित है. मामला उजागर होने पर रजिस्टर में कांट-छांट कर तारीख 10 मई 2025 की गई, जबकि बिल मार्च में ही पास कर दिए गए थे.

पढ़ें जांच रिपोर्ट:- 

नियमों की धज्जियां, GeM पोर्टल का उल्लंघन

जांच रिपोर्ट (सितंबर 2025) के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं. अनुमति केवल सीमन विश्लेषण किट की थी, लेकिन टेंडर में मलेरिया, डेंगू और एचआईवी सहित 45 आइटम जोड़ दिए गए. जो आइटम पोर्टल पर सामान्य श्रेणी में उपलब्ध थे, उनका अवैध रूप से अलग टेंडर निकाला गया. फर्म के पास सभी 45 आइटमों के लिए जरूरी OEM प्रमाण पत्र नहीं थे, फिर भी उसे कार्यादेश दे दिया गया. इतना ही नहीं, 3.41 लाख यूरिन स्ट्रिप की जगह केवल 2.27 लाख ही सप्लाई हुईं, जिससे 6.37 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ.

जांच समिति की रिपोर्ट में ये अधिकारी दोषी

जोधपुर जोन के संयुक्त निदेशक कार्यालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष समिति (जिसमें भवानी सिंह गौड़, जय सिंह और गोपाल सिवर शामिल थे) ने अपनी रिपोर्ट में सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी सहित पांच मुख्य अधिकारियों को सीधे तौर पर उत्तरदायी माना है. जांच रिपोर्ट में डॉ. जाणी के अलावा उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भजनाराम, भंडार पाल विनोद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक चरण सिंह और जिला लेखा प्रबंधक सुशील माथुर को नियमों की अवहेलना और वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया है.

जांच दल की टिप्पणी

समिति ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया है कि फर्म द्वारा प्रस्तुत 'एनालिसिस रिपोर्ट' पूरी तरह फर्जी और संदिग्ध है, क्योंकि इसमें किट के निर्माण की तारीख से भी पहले उनका परीक्षण होना दिखाया गया है, जो वैज्ञानिक रूप से असंभव है और यह अधिकारियों की मिलीभगत की पुष्टि करता है.

सीएमएचओ का पक्ष

हालांकि, डॉ. भैराराम जाणी ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है. उनका कहना है कि सभी खरीद प्रक्रियाएं पारदर्शी रहीं और नियमों के तहत की गई हैं. उन्होंने किसी भी जांच रिपोर्ट की जानकारी होने से इनकार किया है.

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