Rajasthan Politics: शेखावाटी में कांग्रेस को तगड़ा झटका! डोटासरा और कस्वां के सबसे करीबी नेता ने थामा हनुमान बेनीवाल का हाथ, चूरू में बिगड़े समीकरण

क्या चूरू में डोटासरा और राहुल कस्वां का गणित बिगड़ गया है? क्या आगामी चुनावों में कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा ताराचंद सहारण के आरएलपी जॉइन करने का खामियाजा? पढ़िए पूरी इनसाइड रिपोर्ट.

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बदले समीकरण: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के साथ हाथ मिलाते पूर्व पीसीसी सदस्य ताराचंद सहारण
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चीफ गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) और चूरू सांसद राहुल कस्वां (Rahul Kaswan) को अपनों ने ही जोर का झटका दिया है. लंबे समय से कांग्रेस के सिपाही रहे और पीसीसी (Congress) सदस्य ताराचंद सहारण (Tarachand Saharan) ने पार्टी से नाता तोड़ते हुए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का दामन थाम लिया है. नागौर (Nagaur) में हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) के आवास पर हुए इस घटनाक्रम ने शेखावाटी की सियासत में खलबली मचा दी है.

क्यों बदला पाला?

ताराचंद सहारण का कांग्रेस छोड़ना महज एक इस्तीफा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लंबे समय से पनप रहे असंतोष और उपेक्षा का नतीजा माना जा रहा है. सूत्रों की मानें तो सहारण संगठन में अपनी लगातार हो रही अनदेखी से गहरे नाराज थे. पीसीसी चीफ और चूरू सांसद राहुल कस्वां के बेहद करीबी होने के बावजूद उन्हें वह तवज्जो और सम्मान नहीं मिल पा रहा था जिसके वे हकदार थे.

हनुमान बेनीवाल ने इसी नाराजगी को भांपते हुए 'मास्टरस्ट्रोक' खेला और खुद सहारण को पार्टी का दुपट्टा पहनाकर RLP में शामिल किया. इस मौके पर बेनीवाल ने हुंकार भरते हुए कहा कि आज किसान और युवा बीजेपी-कांग्रेस के विकल्प के रूप में सिर्फ आरएलपी की ओर देख रहे हैं.

पूर्व उपप्रधान रह चुके सहारण का सरदारशहर के ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त दबदबा है, ऐसे में उनका पाला बदलना आगामी पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक उलटफेर और भारी नुकसान का संकेत दे रहा है.

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कब होंगे पंचायत चुनाव?

राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है, क्योंकि हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 अप्रैल 2026 तक चुनावी प्रक्रिया संपन्न करने की अंतिम डेडलाइन तय कर दी है. इस समय-सीमा के तहत आयोग पूरी तेजी से काम कर रहा है, जिसमें 29 जनवरी से 7 फरवरी 2026 तक मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं, जबकि फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 25 फरवरी 2026 को कर दिया जाएगा.

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1 जनवरी 2026 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा इस बार मतदान कर सकेंगे, जिसे देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है. इसी 'डेडलाइन' को ध्यान में रखते हुए ताराचंद सहारण जैसे कद्दावर नेताओं का पाला बदलना यह संकेत दे रहा है कि इस बार 'छोटी सरकार' चुनने की जंग बेहद दिलचस्प होने वाली है.

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