निजी बस ऑपरेटरों के हड़ताल पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि बसों के लगातार चालान काटे जा रहे हैं, और वाहनों को जब्त किया जा रहा है. रात्रि के समय बसों में महिलाएं और बच्चियां फंसी रह जाती हैं, और उन्हें वहीं रात गुजारनी पड़ रही है. जूली ने सवाल उठाया कि आखिर वे कौन अधिकारी हैं, जिनकी वजह से पूरी व्यवस्था बिगड़ रही है. और सरकार उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि खाटूश्यामजी का मेला चल रहा है और लाखों श्रद्धालु प्रदेश में आ रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 28 तारीख को प्रधानमंत्री की रैली के लिए बसों की व्यवस्था हो जाती है, लेकिन आम जनता के लिए समाधान नहीं निकाला जा रहा.
"प्रदेश की जनता से दोहरा व्यवहार"
जूली ने कहा कि चालान की कार्रवाई इस तरह की जा रही है कि छोटे वाहन संचालक और बस ऑपरेटर आर्थिक रूप से टूट जाएं. उन्होंने कहा कि पिछली बार भी ऐसी ही स्थिति बनी थी और बाद में बाहर से दबाव आने पर ही व्यवस्थाएं सुधरी थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता के साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि जब सिस्टम कोलैप्स होता है, और सरकार की ओर से व्यवस्थाएं नहीं की जातीं, तो मनमाना किराया वसूला जाता है, और जनता को ही नुकसान उठाना पड़ता है.
बच्चों को किया जा रहा है परेशान
शिक्षा विभाग पर भी हमला करते हुए जूली ने कहा कि परीक्षा के समय में आदेश जारी कर बच्चों को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, और कई आदेश ऐसे समय में निकाले गए हैं, जब विद्यार्थियों की प्राथमिकता परीक्षा की तैयारी होनी चाहिए. महाराणा प्रताप से जुड़े बजट प्रावधानों पर भी उन्होंने सवाल उठाए. जूली ने कहा कि बड़े-बड़े बजट की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन खर्च नगण्य होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यटन सर्किट के लिए डीपीआर तक तैयार नहीं की गई, जबकि दो साल से बजट उपलब्ध है.
"जनता को गुमराह किया जा रहा है"
उद्योग विभाग की सब्सिडी योजना का उदाहरण देते हुए जूली ने कहा कि 30 करोड़ रुपए का प्रावधान होने के बावजूद अब तक बहुत कम राशि जारी की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि बजट आंकड़ों के जरिए जनता को गुमराह किया जा रहा है, जबकि धरातल पर काम नहीं हो रहा.
जूली ने कहा कि सरकार को तुरंत बस हड़ताल का समाधान निकालना चाहिए, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए और घोषणाओं के बजट का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि जनता को राहत मिल सके.
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