प्रशासनिक सर्जरी सिर्फ ट्रांसफर नहीं, सरकार ने जाति 'कंट्रोल और डिलीवरी ओरिएंटेड' रणनीति की मंशा

अधिकारियों का ट्रांसफर फेरबदल लग सकता है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार अब प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ 'डिलीवरी मोड' में शिफ्ट हो गई है. इस पूरी कवायद का सेंटर चीफ मिनिस्टर ऑफिस यानी CMO दिख रहा है.

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सीएम भजनलाल शर्मा

Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने गुरुवार (19 मार्च) देर रात 25 IAS और 9 IPS अधिकारियों के तबादले कर प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है. सतही तौर पर यह रूटीन फेरबदल लग सकता है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार अब प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ 'डिलीवरी मोड' में शिफ्ट हो गई है. इस पूरी कवायद का सेंटर चीफ मिनिस्टर ऑफिस यानी CMO दिख रहा है. मुख्यमंत्री के ACS अखिल अरोड़ा अब फुल फ्लेज्ड मॉनिटरिंग पर ध्यान देंगे. 

अभी तक अरोड़ा के पास जलदाय विभाग का अतिरिक्त प्रभार था जिसे हेमन्त गेरा को दिया गया है. अखिल अरोड़ा को सीएमओ  से पूरी पावर  देने का मैसेज दिख रहा है. इसका सीधा मतलब है कि फैसलों की गति और निगरानी अब ज्यादा केंद्रीकृत होगी.

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कहां क्या है सरकार का फोकस

ऊर्जा और खान जैसे रणनीतिक विभागों में किए गए बदलाव भी सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करते हैं. अजिताभ शर्मा को ऊर्जा से राजस्व मंडल भेजना एडमिनिस्ट्रेटिव री–बैलेंसिंग का संकेत देता है. वहीं अपर्णा अरोड़ा को खान और पेट्रोलियम जैसे रेवेन्यू ओरिएंटेड विभाग की जिम्मेदारी देना बताता है कि सरकार इन क्षेत्रों में पारदर्शिता और राजस्व बढ़ोतरी पर फोकस करना चाहती है.

आरती डोगरा को ऊर्जा विभाग और तीनों डिस्कॉम की पूरी कमान सौंपना एक तरह से जवाबदेही तय करने का प्रयास है. माना जा रहा है कि  अब एनर्जी सेक्टर में प्रदर्शन का सीधे एक लीडरशिप के तहत आकलन किया जाएगा.

शहरी विकास विभाग में आलोक गुप्ता की वापसी भी महज ट्रांसफर नहीं है. इसे जयपुर सहित बड़े शहरों में अटकी या धीमी पड़ी परियोजनाओं को रफ़्तार देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. इससे साफ है कि सरकार शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग को अपनी प्राथमिकता सूची में ऊपर रख रही है.

माइन्यूट मॉनिटरिंग की रणनीति

पुलिस महकमे में इस बार सीमित फेरबदल हुआ है, लेकिन इससे पहले हुए 64 आईपीएस अधिकारियों के बड़े ट्रांसफर को देखते हुए यह लिस्ट “फाइन ट्यूनिंग” की तरह नजर आती है. यानी कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार अब बड़े बदलाव के बजाय माइन्यूट मॉनिटरिंग की रणनीति पर दिख रही है.

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यह पूरा फेरबदल संकेत देता है कि सरकार अब “सिस्टम सेट करने” के पड़ाव से आगे बढ़कर “रिजल्ट देने” के फेज में दाखिल हो रही है. प्रशासनिक नियंत्रण का केंद्रीकरण, अहम विभागों में नए चेहरे और शहरी विकास पर फोकस जैसे तीन बड़े फैक्टर बताते हैं कि आने वाले समय में सरकार अपनी कार्यक्षमता और नतीजों के आधार पर अपनी परफॉर्मेंस गिनाएगी.

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