सावधान! 31 मार्च से पहले जयपुर में कट सकते हैं पानी के कनेक्शन? विधायक सुरेश मोदी की राजस्थान विधानसभा में बड़ी चेतावनी

Jaipur Water Crisis Update: जयपुर में 31 मार्च से पहले पेयजल संकट की आहट! विधानसभा में विधायक सुरेश मोदी ने नलकूपों के बिजली कनेक्शन काटने पर सरकार को घेरा. जानें क्यों पैदा हुए ये हालात और क्या हैं विधायक की बड़ी मांगें?

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जयपुर: 31 मार्च तक का समय, कटेगा पानी का कनेक्शन?
NDTV Reporter

Rajasthan News: अगर आप जयपुर के ग्रामीण इलाके में रहते हैं, तो आने वाले दिन आपकी प्यास पर भारी पड़ सकते हैं. वित्तीय वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च से पहले बिजली विभाग ने बकाया वसूली के लिए अपना 'हंटर' तैयार कर लिया है. विभाग अब ग्राम पंचायतों के उन नलकूपों (Tubewells) के कनेक्शन काटने पर आमादा है, जिनका बिजली बिल जमा नहीं है. इस खतरे को देखते हुए गुरुवार को विधानसभा में भारी हंगामा हुआ है.

'पशु प्यासे मरेंगे और महिलाएं भटकेंगी'

विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के जरिए विधायक सुरेश मोदी ने सरकार को हकीकत का आइना दिखाया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बिजली विभाग ने कनेक्शन काटे, तो ग्रामीण इलाकों में भीषण पेयजल संकट पैदा हो जाएगा. मोदी ने कहा, 'कनेक्शन कटने से न पीने को पानी मिलेगा, न ही पशुओं को बूंद नसीब होगी. गांव की महिलाएं पानी की एक-एक बूंद के लिए मीलों भटकने को मजबूर हो जाएंगी.'

क्यों पैदा हुए हालात?

रातों-रात प्यास का संकट खड़ा होने के पीछे सबसे बड़ी वजह 31 मार्च की डेडलाइन है. दरअसल, वित्तीय वर्ष की समाप्ति करीब है और बिजली विभाग को अपना रेवेन्यू टारगेट पूरा करना है, यही कारण है कि वे वसूली के लिए पंचायतों पर भारी दबाव बना रहे हैं. दूसरी तरफ, बकाया बिल का बोझ इतना बढ़ चुका है कि ग्राम पंचायतों के पास नलकूपों के इन भारी-भरकम बिजली बिलों को जमा करने के लिए पर्याप्त बजट ही उपलब्ध नहीं है. संकट के बीच पिछले साल का उदाहरण भी चर्चा में है. विधायक सुरेश मोदी ने सदन को याद दिलाया कि पिछली सरकार के समय जब ऐसी स्थिति आई थी, तब सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई थी और पंचायतों का सारा बिल खुद भरा था, लेकिन इस बार मामला नीतिगत निर्णयों के बीच अटका हुआ है.

'स्वच्छता और ग्रामीण जीवन पर संकट'

विधायक सुरेश मोदी ने सदन में पुरजोर तरीके से सरकार के सामने यह बात रखी कि पानी कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि स्वच्छता और ग्रामीण जीवन पर संकट मंडरा रहा है और इस स्थिति में नलकूपों के कनेक्शन काटना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि इससे ग्रामीण स्वच्छता और आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर जाएगा.

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संकट के समाधान के लिए रखी दो मांगें

संकट के समाधान के लिए उन्होंने सरकार से दो बड़ी मांगें की हैं. पहली यह कि सरकार खुद भरे बिल. यानी नलकूपों की जितनी भी बकाया बिजली राशि है, उसे राज्य सरकार अपने स्तर पर जमा कराए ताकि आर्थिक तंगी से जूझ रही पंचायतों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े. दूसरी मांग में उन्होंने कहा कि पाबंद हो बिजली विभाग. विभाग को तुरंत कड़े निर्देश दिए जाएं कि पेयजल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी नलकूप का कनेक्शन बकाया के नाम पर न काटा जाए.

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