Khejri Andolan: राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों की कटाई के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. कलेक्ट्रेट के सामने महापड़ाव का आज चौथा दिन है और 480 से अधिक पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर हैं. इस बीच, अनशन पर बैठे किशनलाल खीचड़ के बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. उन्होंने दोटूक कहा है कि अगर हमारी जान गई तो आने वाले समय में नेतागिरी करने वालों को जनता वोट की चोट मिलना तय है.
'पार्टियां राजनीति कर रही हैं, हम मर जाएंगे पर झुकेंगे नहीं'
5 फरवरी को NDTV राजस्थान से विशेष बातचीत में अनशनकारी किशनलाल खीचड़ ने कहा, 'हमारी जान जा रही है, सैकड़ों लोग धरने पर बैठे हैं और उनके जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. हमारी मांग विश्व कल्याण के लिए है, लेकिन पार्टियां इस पर राजनीति कर रही हैं. हमने वोट देकर प्रधानमंत्री, सीएम और एमपी बनाए, सरकार मां-बाप होती है, लेकिन मां-बाप होकर भी हमें यहां मरने के लिए छोड़ दिया गया है.'

अनशन कर रहे किशनलाल ने NDTV राजस्थान पर बड़ा बयान दिया है.
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किशनलाल की चेतावनी, राजनीति करने वालों को अब वोट नहीं देंगे
किशनलाल ने सीधे तौर पर राजनीतिक दलों को चुनौती देते हुए कहा, 'दो साल से धरना चल रहा है और 4 दिन से हम अनशन पर हैं, लेकिन सरकार मान नहीं रही. अब हम इन नेताओं को वोट नहीं देंगे. देश में युवा बहुत हैं, हम दूसरी पार्टियों को मौका देंगे. मैं गुरु जंभेश्वर के 29 नियम मानने वाला बिश्नोई का बच्चा हूं. हम मर जाएंगे, मिट जाएंगे पर गलत नहीं होने देंगे. हम 36 कौम के हित के लिए अनशन कर रहे हैं.'

मंत्री केके विश्नोई, जसवंत सिंह बिश्नोई और बीजेपी उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई कुछ देर पहले सरकार की तरफ से वार्ता करने यहां पहुंचे हैं.
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70 अनशनकारियों की हालत गंभीर, अस्थाई अस्पताल में इलाज
अनशन के कारण अब तक 70 से अधिक लोगों की तबीयत बिगड़ चुकी है. बिश्नोई धर्मशाला को अस्थाई अस्पताल बनाया गया है. गंभीर रूप से बीमार संत लालदास, मांगीलाल, सुभाषचंद्र और गोरधन दास को PBM अस्पताल में भर्ती कराया गया है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें (CMHO डॉ. पुखराज साध के नेतृत्व में) लगातार मौके पर तैनात हैं, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी हालत अब 'मरने जैसी' हो गई है.

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बीकानेर से जोधपुर तक गूंज, कैंडल मार्च और महापड़ाव
देर रात बीकानेर की सड़कों पर विशाल कैंडल मार्च निकाला गया. आंदोलन में पूनम, कमला, सांवरलाल, सुशील कुमार डूडी और जोधपुर से आए श्रवण गोदारा सहित सैकड़ों लोग शामिल हैं. संतों ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि यदि 'ट्री एक्ट' पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन उग्र होगा.
आंदोलन की शुरुआत क्यों हुई?राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को 'मरुस्थल की जीवनरेखा' कहा जाता है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि पश्चिमी राजस्थान (विशेषकर बीकानेर संभाग) में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स और विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है. कई जगहों पर पेड़ों को काटकर रात के अंधेरे में जमीन में गाड़ देने की शिकायतें भी सामने आई हैं.

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मुख्य मांगें क्या हैं?आंदोलनकारी केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं.
- खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए एक विशेष और कड़ा कानून बनाया जाए.
- पेड़ काटने वालों पर लगने वाले मामूली जुर्माने (1000 रुपये) को खत्म कर इसे 'गैर-जमानती अपराध' की श्रेणी में डाला जाए.
- सोलर प्लांट के नाम पर हो रही अवैध कटाई पर तुरंत रोक लगे और दोषियों पर FIR हो.
- संतों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि खेजड़ी संरक्षण को धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया जाए.
2 फरवरी 2026 को बीकानेर में विशाल महापड़ाव हुआ, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए. शहर के बाजार बंद रहे और स्कूलों में छुट्टी दी गई. 3 फरवरी से सामूहिक आमरण अनशन शुरू हुआ. वर्तमान में करीब 480 लोग (जिनमें 29 संत और 60 महिलाएं शामिल हैं) अन्न-जल त्याग कर बैठे हैं. संत समाज ने बुधवार को सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो वे प्राण त्यागने को तैयार हैं.

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बिश्नोई समाज और ऐतिहासिक महत्व समझिएयह आंदोलन बिश्नोई समाज के 'खेजड़ली बलिदान' (1730 ईस्वी) की याद दिलाता है, जहां अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपने सिर कटवा दिए थे. वर्तमान आंदोलनकारी उसी विरासत को बचाना चाहते हैं. इस आंदोलन को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व सीएम अशोक गहलोत समेत कांग्रेस के नई नेता समर्थन दे चुके हैं.
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