Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने बुधवार दोपहर खेजड़ी बचाओ आंदोलन (Khejri Bachao Andolan Bikaner) का समर्थन करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट किया. इसके जरिए उन्होंने प्रदेश की भजनलाल सरकार (Bhajanlal Sharma Govt) को हठधर्मिता छोड़ने की नसीहत दी. साथ ही यह मांग की कि सरकार तुरंत प्रदर्शनकारियों से संवाद करे और अपनी जिद छोड़कर ट्री प्रोटेक्शन एक्ट (Tree Protection Act) पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए.
'पर्यावरण की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं'
गहलोत ने लिखा, 'राजस्थान की पहचान और बिश्नोई समाज सहित समस्त प्रदेशवासियों की आस्था के प्रतीक 'खेजड़ी' को बचाने के लिए बीकानेर में चल रहा आंदोलन अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है. विकास के नाम पर हज़ारों खेजड़ी के पेड़ों की निर्मम कटाई बेहद दुखद है. अमृता देवी बिश्नोई सहित सभी 363 शहीदों की विरासत को बचाने के लिए आज फिर संत और पर्यावरण प्रेमी अनशन पर हैं. अब यह समय की जरूरत हो गई है कि पर्यावरण के मुद्दे पर सभी को गंभीर होने की आवश्यकता है. राज्य सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए और ट्री प्रोटेक्शन एक्ट की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए. हम पर्यावरण की कीमत पर ऐसा विकास स्वीकार नहीं कर सकते जो हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकारमय कर दे.'
राजस्थान की पहचान और बिश्नोई समाज सहित समस्त प्रदेशवासियों की आस्था के प्रतीक 'खेजड़ी' को बचाने के लिए बीकानेर में चल रहा आंदोलन अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) February 4, 2026
विकास के नाम पर हज़ारों खेजड़ी के पेड़ों की निर्मम कटाई बेहद दुखद है। श्रीमती अमृता देवी बिश्नोई सहित सभी 363 शहीदों…
एक दिन पहले वसुंधरा राजे की थी ये अपील
इससे एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) भी इस आंदोलन के समर्थन में पोस्ट कर चुकी हैं. मंगलवार को उन्होंने 'X' पर लिखा था, 'सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण. खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है, जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है. हमारे यहां खेजड़ी की पूजा की जाती है. मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूं. जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है. राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए. इसे बचाना चाहिए. मैं खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूं.'
“सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण"
— Vasundhara Raje (@VasundharaBJP) February 3, 2026
खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहाँ खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूँ। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है।
राजनीति से ऊपर… pic.twitter.com/1ZyMVC8T5W
बीकानेर में अपने हाथ बांधकर किया प्रदर्शन
बताते चलें कि बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत कलेक्ट्रेट के सामने चल रहा महापड़ाव तीसरे दिन भी लगातार जारी है. महापड़ाव स्थल पर बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पहुंचे हैं. सभी ने एकजुट होकर खेजड़ी के संरक्षण और अवैध कटाई पर रोक लगाने की मांग की है. प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया है. पंजाब, श्रीगंगानगर और रावला मंडी से आए तीन युवकों ने चौराहे पर अपने हाथ बांधकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया. उनका कहना था कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थल की जीवनरेखा है. वहीं दूसरी ओर, आमरण अनशन पर बैठे साधु संत सहित 500 अनशनकारी खेजड़ी कटिंग पर कठोर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. आज सुबह साधु सन्यासों के नेतृत्व में धरना स्थल पर हवन का आयोजन किया गया उसके बाद जिला कलेक्टर तक मौन जुलूस निकाल विरोध दर्ज करवाया.
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