IAS नेहा की सफलता के पीछे किसका त्याग? आधे घंटे वाले नियम ने बदल दी जिंदगी

IAS नेहा ब्याडवाल गुजरात के भरूच (Bharuch) में सुपरन्यूमरेरी असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. वर्तमान में उन्हें केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग में असिस्टेंट सेक्रेटरी के तौर पर नियुक्त किया गया.

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IAS नेहा ब्याडवाल

IAS Success Story: UPSC की तैयारी में कैंडिडेट दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन कई बार उसकी सफलता के पीछे पूरे परिवार का त्याग भी छिपा होता है. गुजरात कैडर की IAS नेहा ब्याडवाल भी ऐसा ही मानती हैं. तीन बार हार का मुंह देखने के बाद चौथे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा 2021 पास करने वाली राजस्थान के बेटी कहती है कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय उनके पिता के त्याग को जाता है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि त्याग का मतलब सिर्फ अपनी इच्छाएं छोड़ देना नहीं होता, बल्कि किसी अपने के सपने को अपना सपना बना लेना भी होता है.

एक इंटरव्यू के दौरान नेहा ब्याडवाल से जब त्याग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बिना किसी हिचक के कहा कि उन्हें नहीं लगता कि त्याग सिर्फ कैंडिडेट करता है. उनका कहना है कि, त्याग का मतलब यह नहीं है कि आपने घूमना छोड़ दिया या फिर अपने लिए कोई बड़ी चीज नहीं खरीदी. असली त्याग वह होता है, जब कोई इंसान अपनी थकान और अपनी सुविधा को पीछे छोड़कर किसी दूसरे के भविष्य के लिए समय निकालता है.

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Photo Credit: Insta/Neha byadwal

ऑफिस से लौटते ही शुरू हो जाती थी क्लास

नेहा ने बताया कि उनके पिता आयकर विभाग में अधिकारी हैं. पूरे दिन ऑफिस में काम करने के बाद जब वे घर लौटते थे तो आराम करने या टीवी देखने के बजाय सीधे उनकी पढ़ाई पर ध्यान देते थे. उन्होंने घर में एक नियम बना रखा था. पिता के घर आने के करीब आधे घंटे बाद पढ़ाई की क्लास शुरू हो जाती थी. उस आधे घंटे में खाना भी खाना होता था और फिर पढ़ाने बैठ जाना होता था.

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नेहा ने कहा कि, त्याग ये होता है कि आप जब दिनभर काम करके थके हारे शाम को घर आएं, तो आपके मन में यही ख्याल होता है कि अब हम हमारी फैमिली के साथ बैठेंगे और बात करेंगे, टीवी देखेंगे, लेकिन मेरे पिता ने घर में एक बोर्ड लगा दिया था. उसके आने के 30 मिनट बाद ही हमारी पढ़ाई फिर से शुरू हो जाती थी.

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तीन असफलताओं के बाद भी नहीं छोड़ा सपना

नेहा ब्याडवाल की UPSC यात्रा आसान नहीं रही. लगातार तीन प्रयासों में उन्हें असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. चौथे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ऑल इंडिया रैंक 569 हासिल की और महज 24 साल की उम्र में गुजरात कैडर की IAS अधिकारी बन गईं.

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3 साल तक सोशल मीडिया से दूरी, तब जाकर पूरा हुआ सपना

नेहा ब्याडवाल ने UPSC की तैयारी के दौरान सिर्फ पढ़ाई पर फोकस करने का फैसला किया. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि तैयारी के दौरान करीब तीन साल तक मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी. उनका मानना था कि सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा में सफलता के लिए लगातार फोकस और अनुशासन सबसे जरूरी है. 

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1 लाख से अधिक फॉलोअर्स, लेकिन सोशल मीडिया से बनाई दूरी

जब उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाने के फैसला किया तब उनके 1 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे, लेकिन उन्होंने खुद को 3 साल तक डिजिटल डिटॉक्स रखा. आज वही नेहा सोशल मीडिया पर लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही हैं. प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं. उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 1.62 लाख (162K) फॉलोअर्स हैं, जहां वह UPSC अभ्यर्थियों के लिए तैयारी, मोटिवेशन और अपने अनुभव साझा करती रहती हैं.

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वर्तमान में कहां हैं और क्या कर रही हैं नेहा ब्याडवाल?

IAS नेहा ब्याडवाल अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद गुजरात के भरूच (Bharuch) में सुपरन्यूमरेरी असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. हाल ही में उन्हें केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग में आठ सप्ताह के लिए असिस्टेंट सेक्रेटरी के तौर पर नियुक्त किया गया.

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