राजकुमारी की व‍िरासत से न‍िकलकर वसुंधरा बनीं लोकतांत्र‍िक 'महारानी', मां से सीखा राजनीत‍ि का ककहरा 

आज मह‍िला द‍िवस है, और संयोग से वसुंधरा राजे का जन्‍मदिन भी है, ज‍िससे यह द‍िन और खास हो जाता है. पढें उनके जन्‍मद‍िन पर वसुंधरा के जीवन से जुड़ी रोचक बातें...

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राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का 73वां जन्मदिन है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन आज (8 मार्च) राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपना 73वां जन्मदिन मना रही हैं. इस खास मौके पर भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है. वसुंधरा राजे इस बार सादगीपूर्ण तरीके से अपना जन्मदिन मना रही हैं. हालांकि वे किसी बड़े पद पर नहीं हैं, लेकिन राजस्थान की राजनीति में उनकी पकड़ आज भी मजबूत मानी जाती है. हाल ही में उन्हें भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में शामिल किया गया है. दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं राजे अक्सर अपने राजनीतिक बयानों और सक्रियता के कारण चर्चा में रहती हैं. 

राजघराने में जन्म...

वसुंधरा राजे का जन्म 8 मार्च 1953 को मुंबई में हुआ. वे ग्वालियर के प्रसिद्ध सिंधिया राजघराने से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता महाराजा जीवाजीराव सिंधिया ग्वालियर रियासत के अंतिम शासक थे, जबकि उनकी मां राजमाता विजयाराजे सिंधिया भारतीय जनसंघ और बाद में भाजपा की वरिष्ठ नेता थीं. परिवार में राजनीति का माहौल होने के कारण उन्हें बचपन से ही सार्वजनिक जीवन को करीब से देखने का मौका मिला.

पढ़ाई मुंबई और कोडाइकनाल में

उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई तमिलनाडु के कोडाइकनाल स्थित प्रेजेंटेशन कॉन्वेंट स्कूल से की. इसके बाद मुंबई के सोफिया कॉलेज से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन से ही उनमें प्रशासन और राजनीति के प्रति रुचि दिखाई देने लगी थी. उन्होंने अपनी मां से ही राजनीत‍ि का ककहरा सीखा. मां ने उन्हें भाजपा ज्‍वाइन कराया.

विवाह के बाद राजस्थान से जुड़ाव

वर्ष 1972 में वसुंधरा राजे का विवाह धौलपुर राजघराने के महाराज हेमंत सिंह से हुआ. इसी विवाह के बाद उनका राजस्थान से गहरा संबंध बना. बाद में दोनों अलग हो गए, लेकिन राजस्थान ही उनकी राजनीतिक कर्मभूमि बन गया. उनका एक बेटा दुष्यंत सिंह है, जो झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. 

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भाजपा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

वसुंधरा राजे ने 1980 के दशक में भारतीय जनता पार्टी से सक्रिय राजनीति की शुरुआत की. वर्ष 1985 में वे पहली बार राजस्थान विधानसभा के लिए धौलपुर से विधायक चुनी गईं. इसके बाद 1989 में झालावाड़ से लोकसभा सांसद बनीं और कई बार संसद पहुंचीं. केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान उन्होंने विदेश मंत्रालय और कार्मिक विभाग में राज्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली. 

राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री

वर्ष 2003 में भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया. चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली और वसुंधरा राजे राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. उनका पहला कार्यकाल 2003 से 2008 तक रहा. इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली और वे दूसरी बार मुख्यमंत्री बनीं. उस चुनाव में भाजपा ने 163 सीटें जीतकर बड़ा बहुमत हासिल किया. उनका दूसरा कार्यकाल 2013 से 2018 तक चला.

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सीएम रहते कई योजनाएं शुरू कीं 

मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई योजनाएं शुरू कीं. इनमें भामाशाह योजना, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान, अन्नपूर्णा रसोई योजना, ग्रामीण गौरव पथ योजना और उद्योग निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां प्रमुख रहीं. इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना था. 

करीब तीन दशक से अधिक समय से वसुंधरा राजे राजस्थान की राजनीति में सक्रिय हैं.  झालावाड़-झालरापाटन क्षेत्र को उनका राजनीतिक गढ़ माना जाता है. भाजपा के भीतर भी उन्हें राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है. 

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राजघराने की विरासत से निकलकर लोकतांत्रिक राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली वसुंधरा राजे का सफर राजस्थान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है. 

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