राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को डीडवाना- कुचामन के दौरे पर रहीं. वसुंधरा ने छोटी खाटू में आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ के 11वें आचार्य महाश्रमण जी से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया. इस दौरान आचार्य महाश्रमण जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि सच्चाई की राह पर चलना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है. उन्होंने कहा कि सत्य और अहिंसा ही समाज को मजबूती प्रदान करते हैं और यही देश की प्रगति का आधार हैं.
"दिल तोड़ना भी हिंसा है"
आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव में वसुंधरा राजे का दर्द भी छलका और पूर्व सीएम ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा पर आधारित है. किसी भी जीव, किसी भी प्राणी के जीवन को नुक़सान पहुंचाना हिंसा मानी गई है, लेकिन हथियार से हिंसा करना या किसी को मारना-पीटना ही हिंसा नहीं है. किसी का दिल दुखाना और किसी का दिल तोड़ना भी हिंसा है, लेकिन राजनीति में अक्सर ऐसा होता है. राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं और दिल दुखाए भी जाते हैं.
वसुंधरा राजे
"हक छीनना भी अधर्म है"
पूर्व मुख्यमंत्री राजे ने कहा कि उनकी राजमाता विजया राजे सिंधिया ने सिखाया कि जीवन में किसी का मन आहत मत करो. मैं उन्हीं की राह पर चल रही हूं. उन्होंने कहा कि किसी के साथ अन्याय करना और किसी का हक छीनना भी अधर्म है. भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय का अभाव है. यदि लोग समय निकाल कर भगवान का स्मरण कर लें तो जीवन में कठिनाइयां आए ही नहीं.
विरोध की भावना पर क्या बोलीं वसुंधरा
उन्होंने राजनीति और सामाजिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि विरोध की भावना में किसी को नुकसान पहुंचाकर जीत मान लेना गलत सोच है. ऐसी प्रवृत्ति से तात्कालिक लाभ भले दिखे, लेकिन अंततः नुकसान स्वयं को ही होता है. इस मौके पर आचार्य महाश्रमण ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को संस्कारवान नेता बताया, जो संतों के सामने आसन पर नहीं बैठती. कुर्सी का उपयोग नहीं करती हैं.
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