राजस्थान की राजनीति में आखिर क्यों चर्चा में है '25 सितंबर' की घटना? जानिए उस दिन क्या हुआ था

राजस्थान की राजनीति में इस समय '25 सितंबर' की चर्चा तेज है. जानिए 2022 की उस रात क्या हुआ था, जिसने जयपुर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया था और आज 4 साल बाद अचानक इस पर चर्चा क्यों तेज हो गई है...

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आखिर क्या है राजस्थान का वो '25 सितंबर कांड'? 4 साल बाद अचानक क्यों छिड़ गया गहलोत-पायलट का ये नया विवाद! (फाइल फोटो)
ANI

Rajasthan News: अगर आप 25 सितंबर की घटना को मानेसर एपिसोड समझ रहे हैं तो जरा ठहरिए. आप गलत हैं. मानेसर कांड जुलाई 2020 को हुआ था. राजस्थान की सियासत में इस वक्त जिस '25 सितंबर' का जिक्र हो रहा है, वो साल 2022 की घटना है जो कांग्रेस के सबसे बड़े सियासी हाई-वोल्टेज ड्रामे से जुड़ी है.

सितंबर 2022 में कांग्रेस आलाकमान ने अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी की थी. पार्टी में 'एक व्यक्ति, एक पद' के नियम के कारण गहलोत को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ता. आलाकमान की तरफ से सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की सुगबुगाहट तेज थी. इससे नाराज होकर अशोक गहलोत गुट के करीब 82 वफादार विधायक अचानक विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के आवास पर पहुंच गए और सामूहिक इस्तीफे की धमकी देते हुए सीएलपी बैठक का बहिष्कार कर दिया. दिल्ली से आए पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन मुख्यमंत्री आवास पर इंतजार करते रह गए और बिना किसी फैसले के उन्हें वापस लौटना पड़ा.

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'मैंने सोनिया गांधी से माफी मांगी थी'

इस घटनाक्रम पर चल रहे दुष्प्रचार को लेकर 4 साल बाद अशोक गहलोत ने अपनी चुप्पी तोड़ी. गहलोत ने स्पष्ट किया कि 25 सितंबर 2022 को जो हुआ, वह कांग्रेस आलाकमान या सोनिया गांधी के खिलाफ कोई बगावत नहीं थी. उन्होंने कहा, 'अगर हमारे 100 विधायकों ने यह बात उठाई कि मानेसर संकट के समय उन्होंने आलाकमान का साथ दिया और सरकार बचाई, तो उनमें से किसी को भी मुख्यमंत्री बना दिया जाता. उन्होंने क्या गलत कहा था? लेकिन चूंकि मैं उस वक्त विधायक दल का नेता था, इसलिए इस पूरी स्थिति के लिए मैंने सोनिया गांधी से माफी भी मांगी.' गहलोत के मुताबिक, यह बगावत आलाकमान के खिलाफ नहीं, बल्कि सिर्फ सचिन पायलट को सीएम पद सौंपे जाने के खिलाफ विधायकों का व्यक्तिगत विरोध था क्योंकि विधायकों को मानेसर प्रकरण की वजह से पायलट स्वीकार नहीं थे.

'अचानक ऑब्जर्वर आए और मैं बदनाम हो गया'

अशोक गहलोत ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से पीछे नहीं भाग रहे थे. उन्होंने कहा, ''मैं पढ़ा-लिखा व्यक्ति हूं और अच्छी तरह समझता हूं कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद क्या मायने रखता है. जिस पद पर महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और मोतीलाल नेहरू जैसे दिग्गज रहे हों, उसे संभालने का मौका अगर सोनिया गांधी और कांग्रेस मुझे दे रही थी, तो मैं मना क्यों करता? लेकिन वहां ऐसी स्थिति पैदा कर दी गई, जो मेरे हिसाब से एक बड़ी साजिश थी. अचानक पर्यवेक्षक आ गए, तमाशा खड़ा हो गया और बिना वजह मैं बदनाम हो गया.' गहलोत ने कहा कि पूरे मुल्क के दिमाग में यह बात डाल दी गई कि उन्हें मुख्यमंत्री रहना था, इसलिए उन्होंने बगावत करवा दी, जबकि वे सिर्फ इसलिए चुप थे क्योंकि उन्हें सोनिया गांधी को अपनी बात बतानी थी.

'सोशल मीडिया ने पायलट को नुकसान पहुंचाया'

मीडिया और सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि कुछ लोग बिना कुछ जाने ही कमेंट कर देते हैं. उन्होंने कहा, ''मैं सोशल मीडिया से अपील करना चाहूंगा कि कृपा करके सच्चाई का साथ दें और सचिन पायलट का नुकसान करना बंद करें. आप लोग पहले ही उनका बहुत नुकसान कर चुके हैं. पायलट साहब का सबसे बड़ा नुकसान वह मीडिया कर रहा है, जो लीक से हटकर झूठी खबरें चलाता है और मनगढ़ंत पोस्ट डालकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है.' गहलोत ने सवाल उठाया कि कभी उन्हें प्राइम मिनिस्टर तो कभी कांग्रेस प्रेसिडेंट का उम्मीदवार बताकर मीडिया क्यों उनके पीछे पड़ा हुआ है.

'पायलट को गलती स्वीकार करनी चाहिए'

सचिन पायलट के साथ अपने रिश्तों पर बात करते हुए गहलोत ने कहा कि वे बचपन से उनके परिवार में आते-जाते रहे हैं और उन्हें आज भी बच्चे की तरह मानते हैं. उन्होंने कहा, 'गलती इंसान से ही तो होती है. उन्होंने गलती कर दी तो स्वीकार कर लेना चाहिए. मैंने जैसलमेर के होटल से आते ही स्टेटमेंट दिया था 'फॉरगेट एंड फॉरगिव'. अगर मेरी भावना सचिन पायलट समझ जाते और भूलो और माफ करो करते, तो बात अलग थी. सच्चाई को स्वीकार उन्होंने करना सीखा नहीं, उसके कारण ये इशू अभी तक बना हुआ है.'

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'मैंने केंद्र में मंत्री बनने में मदद की, पर उन्होंने जुबान से कभी नहीं कहा'

अशोक गहलोत ने एक पुराना वाकया याद करते हुए पायलट के प्रति अपना दुख भी जाहिर किया. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने हम सबको सब कुछ दिया है, इनको केंद्रीय मंत्री बनाया, मैंने उनको केंद्रीय मंत्री बनाने में मदद करी. उनका फोन आया तो मैंने कहा मैंने आपके लिए बात कर ली है, आप मंत्री बन जाओगे. लेकिन उन्होंने अपनी जुबान से ये कभी नहीं कहा, इस बात की मुझे शिकायत भी है. अगर वो अपने दोस्तों में भी कहते कि अशोक गहलोत ने मेरी मदद की थी, तो मेरा दिल भर जाता.' गहलोत ने अंत में कहा कि आज देश और कांग्रेस संकट में हैं, इसलिए सभी को मतभेद भुलाकर एक हो जाना चाहिए.

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