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जिस 'प्रचंड' में राष्ट्रपति मुर्मू ने बनाया इतिहास वो क्यों है खास- जानिए एयरफोर्स के LCH हेलिकॉप्टर के बारे में 10 बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जैसलमेर में भारतीय वायुसेना के जिस पहले स्वदेशी लड़ाकू हेलिकॉप्टर में यात्रा कर इतिहास बनाया उसकी कई विशेषताएं हैं.

जिस 'प्रचंड' में राष्ट्रपति मुर्मू ने बनाया इतिहास वो क्यों है खास- जानिए एयरफोर्स के LCH हेलिकॉप्टर के बारे में 10 बातें
@IAF_MCC

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज, 27 फरवरी को भारत के पहले स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' में उड़ान भरकर एक नया इतिहास रच दिया है. राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारतीय वायुसेना के स्टेशन से उड़ान भरी. वह देश की पहली राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने किसी लड़ाकू हेलीकॉप्टर में को-पायलट के रूप में उड़ान भरी. करीब 25 मिनट की इस उड़ान में उन्होंने पोकरण के आसमान से भारतीय वायुसेना के सैन्य अभ्यास 'वायु शक्ति-2026' के अभ्यास स्थल का मुआयना किया. प्रचंड हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना का पहला स्वदेशी हेलिकॉप्टर है. आइए जानते हैं कि भारतीय वायुसेना का यह हेलिकॉप्टर क्यों खास है.

  1. प्रचंड भारत का पहला पूरी तरह से देश में ही निर्मित बहुउद्देश्यीय कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (Multirole Combat Helicopter) है. इसे बेंगलुरू स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने बनाया है. प्रचंड को 3 अक्टूबर 2022 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. 
  2. प्रचंड एक लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (Light Combat Helicopters LCH) है जिसे हल्के स्तर के हमलों में कार्रवाई के लिए बनाया गया है. प्रचंड हेलिकॉप्टर से ज़मीन के साथ-साथ हवा में भी हमले किए जा सकते हैं. यह राजस्थान में पाकिस्तान से लगी रेगिस्तानी इलाकों के अलावा कश्मीर और अरुणाचल जैसे हिमालय के पहाड़ी इलाकों में भी सीमा पर सेना की मदद कर सकता है.
  3. प्रचंड हेलिकॉप्टरों का निर्माण HAL के कर्नाटक स्थित तुमकुरू (Tumakuru) में किया जा रहा है. यहां प्रतिवर्ष लगभग 30 हेलिकॉप्टरों का निर्माण हो सकता है. लेकिन, आवश्यकता पड़ने पर इसकी क्षमता 100 तक बढ़ाई जा सकती है.
  4. प्रचंड हेलिकॉप्टर 5,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर जाकर हमले कर सकता है. यह दुनिया का इकलौता अटैक हेलीकॉप्टर है जो 5000 मीटर की ऊंचाई पर लैंड और टेक ऑफ कर सकता है.
    प्रचंड को 2022 में एयरफोर्स में शामिल किया गया था

    प्रचंड को 2022 में एयरफोर्स में शामिल किया गया था
    Photo Credit: @IAF_MCC

  5. प्रचंड 280 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है और एक बार में 700 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकता है. यह तीन घंटे तक उड़ान भर सकता है.
  6. इस हेलीकॉप्टर का वजन लगभग 5.8 टन है. यह 15.8 मीटर लंबा है. इसकी ऊंचाई 4.7 मीटर है.
  7. यह दुश्मन के एयर डिफ़ेंस सिस्टम, उनके ड्रोन और कम-ऊंचाई वाले एयरक्राफ्ट को तबाह कर सकता है. यह दुश्मन के बंकरों को नष्ट करने, आतंक-विरोधी अभियानों में भी मदद कर सकता है. साथ ही, यह ज़मीन पर सेना को भी हवाई मदद दे सकता है.
  8. प्रचंड में आधुनिक हथियार लगाए जा सकते हैं, जिनमें हेलेना एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, 70 एमएम रॉकेट और 20 एमएम की एक गन शामिल है. हेलीकॉप्टर में ट्विन इंजन, आर्मर्ड कॉकपिट (हथियारों से सुरक्षा देने वाला) और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम भी मौजूद हैं. इससे यह युद्ध के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रहता है. दुश्मन की गोलियों से पायलट सुरक्षित रहता है. लिहाजा इससे ऑपरेशन के दौरान पायलट आराम से ऑपरेट कर सकता है.
  9. रक्षा मंत्रालय ने पिछले वर्ष 28 मार्च 2025 को 156 प्रचंड हेलिकॉप्टरों को खरीदने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को ऑर्डर दिया था. इनमें से 66 हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना और 90 हेलिकॉप्टर भारतीय सेना को दिए जाएंगे.
  10. प्रचंड में 65% से अधिक सामग्रियां देश की ही 250 कंपनियों से ली गई हैं. इनमें ज़्यादातर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) हैं. इनसे 8,500 लोगों के लिए नौकरियों का सृजन हुआ है.

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