Rajasthan Politics: 'बोली लगाओ, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष की कुर्सी पाओ', मेंबरशिप फीस को लेकर पार्टी में उठे सवाल

यूथ कांग्रेस चुनाव के लिए अनिल चोपड़ा और अभिषेक चौधरी दावेदार माने जा रहे हैं. वहीं, मुकेश भाकर के करीबी मुकुल खीचड़ भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.

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राजस्थान में यूथ कांग्रेस के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. लेकिन इस दौरान मेंबरशिप फीस को लेकर काफी चर्चा है. इस चुनाव में तीन प्रमुख चेहरे किस्मत आजमा रहे हैं. विश्लेषकों का मानना है कि इनमें से जो युवा ज्यादा पैसा खर्च करेगा, वही जीत हासिल करेगा. इसे कुछ इस तरह भी देखा जा रहा है कि जो बड़ी बोली लगाएगा, वही यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद ले जाएगा. इसका कारण है, प्रत्येक वोटर के लिए 75 रुपए सदस्यता शुल्क जमा कराकर पहले मेंबरशिप लेना और उसके बाद वोट डालने का अधिकार हासिल करना. 

मताधिकार के लिए पैसे क्यों?

ऐसे में सवाल पूछा जा रहा है कि कोई व्यक्ति केवल मताधिकार के लिए 75 रुपए क्यों देगा? चुनाव प्रक्रिया को नजदीक से देख रहे लोग तो यहां तक मानते हैं कि प्रत्याशी ही सदस्यता शुल्क जमा करता है. लेकिन मामला केवल सदस्यता शुल्क जमा कराने तक ही नहीं रुक जाता. इसके ऊपर भी बोली लगती है और प्रत्येक वोटर के लिए प्रत्याशी  कितने पैसे देता है, उससे जीत तय होगी.

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पिछली बार पूनिया जीते थे चुनाव

दरअसल, पिछली बार यूथ कांग्रेस के चुनाव में सदस्यता शुल्क 50 रुपए रखा गया था. तीन साल पहले हुए चुनाव में अभिमन्यु पूनिया को अध्यक्ष बनाया था, जबकि यशवीर शूरा और सुधीन्द्र मूंड को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. पिछले चुनाव में सुधीन्द्र मूंड को 5 लाख 58 हज़ार, अभिमन्यु पूनिया को 5 लाख 31 हज़ार और यशवीर शूरा को 3 लाख 86 हज़ार वोट मिले थे. 

कांग्रेस के खजाने में आएंगे 19 करोड़ रुपए

मामला सिर्फ 75 रुपए का नहीं है. बल्कि, इस बार प्रदेश अध्यक्ष की सीट पर दावा जताने वाले चेहरों का मानना है कि उनको भी कम से कम तकरीबन 5 लाख सदस्य तो प्रत्येक को बनाने ही पड़ेंगे. जिलाध्यक्ष और प्रदेश महासचिव के लिए किस्मत आजमाने वाले नेता भी अपने सदस्य बनाएंगे. ऐसे में पार्टी फंड में फीस के रूप में आने वाली रकम कांग्रेस के ख़ज़ाने का वज़न भी बढ़ाएगी. एक मोटे अनुमान के तौर पर कांग्रेस के संगठन को इस चुनाव से तकरीबन 18–19 करोड़ रुपए पार्टी के खजाने में आने की उम्मीद है.

इन दावेदारों के बीच मुकाबला

इस बार के चुनाव में अनिल चोपड़ा, अभिषेक चौधरी और मुकुल खीचड़ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. चोपड़ा जयपुर ग्रामीण से सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं और नजदीकी मुकाबले में राव राजेंद्र सिंह से हारकर दूसरे नंबर पर रहे. वहीं, अभिषेक चौधरी ने कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के आगे झोटवाड़ा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था. तीसरा नाम मुकुल खीचड़ के रूप में है. हालांकि खीचड़ बहुत ज्यादा चर्चित नहीं हैं, लेकिन दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. खीचड़ को लाडनू से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर का करीबी माना जाता है. कांग्रेस संगठन से जुड़े लोग मानते हैं कि मुकेश भाकर संगठन चुनाव की रणनीति में माहिर हैं और उनको पता है कि अपने प्रत्याशी के लिए ज्यादा से ज्यादा वोट कैसे डलवाने हैं?

प्रत्याशियों को देनी पड़ेगी फीस से ज्यादा राशि!

संगठन के नियमों के मुताबिक तो इस बार सदस्यता शुल्क 75 रुपए ही तय किया गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि प्रत्याशी को 75 रुपए से ज्यादा का भी भुगतान करना पड़ सकता है. दरअसल इस चुनाव में सारा खेल नम्बर का है. जिसके पास जितने ज्यादा वोट आएंगे, उसकी जीत उतनी ही पुख्ता होती जाएगी. लेकिन वोट के लिए सदस्य चाहिए और सदस्य खुद को ही बनाने हैं, तो सवाल यह उठता है कि नेता को जिताने के लिए दूसरे युवा 75 रुपए खर्च क्यों करेंगे?

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अनियमिताओं की जताई जा रही है आशंका

वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा कहते हैं, "कई बार यह रकम 80 से 90 रुपए तक पहुंच जाती है. उसी होड़ में दूसरे दावेदार 100 रुपए या उससे ज्यादा भी देने के लिए तैयार होते हैं. इसी के चलते माना यही जा रहा है कि जो सदस्यता शुल्क के लिए सबसे बड़ी बोली, सबसे ज्यादा वोटों पर लगाएगा, वही राजस्थान यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेगा."

हालांकि संगठन के भीतर चुनाव के इस मॉडल पर कई बार आशंका जताई गई, पार्टी नेतृत्व को सुझाव भी दिए गए और अनियमितताओं की शिकायत भी की गई. लेकिन अपने चुनावी मॉडल को कांग्रेस पार्टी और यूथ कांग्रेस दोनों ही सही ठहराते रहे हैं. अब सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर सिर्फ पैसा ही अहमियत रखता है या युवा नेता की प्रतिभा?

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