प्रदेश में एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय था जिसने न केवल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि सरकारी खजाने को भी करोड़ों का चूना लगाया। इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड ई-मित्र संचालकों और कुछ शिक्षण संस्थानों की मिलीभगत को बताया जा रहा है।