जहां पूरे देश में दशहरे पर रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत मनाई जाती है, वहीं जोधपुर के किला रोड के पास दशानंद रावण का मंदिर है. यहां गौधा गोत्र के दवे ब्राह्मण खुद को रावण का वंशज बताते हैं, सदियों से उसकी पूजा करते हैं और दशहरे को उत्सव नहीं, शोक के रूप में मनाते हैं. खास बात यह है कि परिवार की नई पीढ़ी भी इस आस्था और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रही है.
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