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जगन्नाथ मंदिर में हर दिन क्यों बदली जाती है ध्वजा, एक दिन भी भूले तो चूकानी पड़ सकती है बड़ी कीमत!

रथ यात्रा (Jagannath Rath yatra) हो या मंदिर में हर दिन ध्वज बदलने की प्रक्रिया, इनसे जुड़ी कई अनोखी बातें हैं, जिन्हें लोग बड़ी उत्सुकता से जानना चाहते हैं.

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जगन्नाथ मंदिर में हर दिन क्यों बदली जाती है ध्वजा, एक दिन भी भूले तो चूकानी पड़ सकती है बड़ी कीमत!

Jagannath Temple Flag Story: ओडिशा (Odisha) के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. 7 जुलाई से पुरी की सड़कें भीड़ से भर जाएंगी क्योंकि भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ गर्भगृह से बाहर निकलेंगे. 10 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के आखिरी दिन वे अपनी मौसी के घर जाते हैं. रथ यात्रा (Jagannath Rath yatra) हो या मंदिर में हर दिन ध्वज बदलने की प्रक्रिया, इनसे जुड़ी कई अनोखी बातें हैं, जिन्हें लोग बड़ी उत्सुकता से जानना चाहते हैं. मान्यता है कि हर सुबह सूर्योदय से पहले और शाम को सूर्यास्त के समय मंदिर पर लगे झंडे को बदलकर नया झंडा लगा दिया जाता है. मंदिर की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे कई धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं हैं। इसी को लेकर शुक्रवार को उदयपुर के जगन्नाथ मंदिर में झंडा बदलने की प्रक्रिया ट्विटर पर देखने को मिली.

ध्वज बदलने के पीछे के कारण (Jagannath Temple Flag)

मंदिर के गुंबद पर लगा ध्वज रोज बदला जाता है. यह काम हर शाम मंदिर के सेवादार करते हैं. यह ध्वजा हमेशा समुद्र से बहने वाली हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. ज्यादातर समुद्री तटों पर हवा समुद्र से जमीन की तरफ बहती है, लेकिन पुरी में ऐसा नहीं है, यहां हवा जमीन से समुद्र की तरफ बहती है, जो अपने आप में किसी रहस्य से कम नहीं है.

चोला परिवार बदलता है ध्वजा

जगन्नाथ पुरी में लहराने वाला झंडा 20 फीट का त्रिकोणीय झंडा है जिसे हर दिन बदला जाता है. इसे बदलने की जिम्मेदारी चोल परिवार के पास है. वे 800 सालों से हर दिन समय पर ऐसा करते आ रहे हैं. पौराणिक मान्यता है कि अगर झंडा हर दिन नहीं बदला जाता है तो मंदिर अपने आप 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा. जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर फहराया गया ध्वज  काफी दूर से दिखाई देता है. इसके अलावा एक और पौराणिक मान्यता भी इससे जुड़ी है. जिसके अनुसार भगवान जगन्नाथ ने एक सपने में देखा कि उनका झंडा पुराना और फटा हुआ है. अगले दिन पुजारियों ने पाया कि झंडा वाकई पुराना हो गया है और तब से उन्होंने रोजाना झंडा बदलना शुरू कर दिया. झंडे को भगवान जगन्नाथ का प्रतीक माना जाता है. नया झंडा फहराना भगवान के प्रति सम्मान और भक्ति का प्रतीक है. ऐसा माना जाता है कि पुराना झंडा नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है, इसलिए इसे बदलकर नया झंडा लगा दिया जाता है.

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