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This Article is From Jul 23, 2023

नदी किनारे प्यासा गांव - लड़कों की नहीं हो रही शादी - पहाड़ चढ़कर लाना पड़ता है पानी

झालावाड़ में कई बरसाती नदियां हैं. बारिश के मौसम में ये नदियां उफान पर बहती हैं. अगर इन नदियों का पानी सहज कर रख लिया जाए तो पूरे जिले की पानी की समस्या से निजात मिल सकती है. लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं जाता.

नदी किनारे प्यासा गांव - लड़कों की नहीं हो रही शादी - पहाड़ चढ़कर लाना पड़ता है पानी
झालावाड़:

राजस्थान का झालावाड़ उन जिलों में शामिल है, जहां बादल पानी बरसाने में जरा सी भी कंजूसी नहीं करते. लेकिन यह एक तस्वीर है, एक दूसरी तस्वीर है, जिसके बारे में लोगों को कम ही जानकारी है. जिले के कई गांव हैं, जिनके अलग-बगल से नदियां तो बह रही हैं, लेकिन उन गांवों में पीने के लिए पानी तक नहीं है. इसकी वजह से गांव के युवाओं की शादियों तक नहीं हो रही है. कोई भी अपनी बेटी की शादी इन गावों में नहीं करना चाहता. इतना ही नहीं, कई युवकों की पत्नियां शादी के बाद अपने पतियों को छोड़कर चली गई हैं. क्योंकि उन्हें पहाड़ पार करके दूर से पानी लाना पड़ता है. 

गांव के लोगों का कहना है कि चुनाव के वक्त नेतागण वोट लेने तो आते हैं, इस दौरान उनकी समस्याएं भी सुनते हैं. लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी ओर देखते भी नहीं है. इन गांवों के नाम हैं चंगेरी, झिरनिया और व्रन्दावन.

झालावाड़ में कई बरसाती नदियां हैं. बारिश के मौसम में ये नदियां उफान पर बहती हैं. अगर इन नदियों का पानी सहज कर रख लिया जाए तो पूरे जिले की पानी की समस्या से निजात मिल सकती है. लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं जाता.

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बारिश के दौरान इस इलाके में चारों तरफ पानी ही पानी होता है. यहां तक की आने-जाने के रास्ते तक बंद हो जाते हैं. लेकिन वह पानी नदियों के रास्ते बहकर चला जाता है. इसके बाद गांववालों को नदी में खड्ढा खोदकर पानी निकालता पड़ता है. फिर पहाड़ चढ़कर पानी लाना पड़ता है. इसमें कई घंटों का समय लग जाता है.

गांव के लोग अपने घरों पर मेहमान बुलाने से भी कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि पहले ही परिवार की जरूरत के हिसाब से पानी नहीं है. ऐसे में मेहमान के लिए पानी कहां से लाया जाएगा.

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इसके अलावा इन गांवों में कोई भी अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता. कई युवाओं की शादी की उम्र निकल चुकी है. झिरनियां गांव में करीब 50 युवा कुंवारे हैं. पूरे गांव में एक कुंआ और एक हैंडपंप है.

ऐसा ही हाल चंगेरी गांव का है. यहां गांव गागरोन किले के सामने पहाड़ी पर बसा है. इस गांव में करीब 100 घर हैं, इसमें करीब एक दर्जन कुंवारे शादी के इंतजार में हैं. 

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यहां रहने वाली रुकमणी बाई का कहना है कि उनके तीन बेटे हैं, जिनकी अभी तक शादी नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि उन्हें पानी के लिए पहाड़ी से उतरकर जाना पड़ता है. उनका कहना है कि इस दौरान वो कई बार गिर जाती हैं.

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