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This Article is From Nov 20, 2023

Chhath Puja 2023: छठ पूजा के आखिरी दिन उगते सूर्य को दिया गया अर्घ्य, महापर्व का हुआ समापन

बिहार निवासी युवती अंजली मंडल ने बताया कि इस पर्व पर खुशी इस बात की है यह पर्व भक्तिमय पर्व है. हमारी माताएं इस व्रत को करती हैं तो हमारा भी इच्छा होती है कि हम भी यह व्रत करें लेकिन हमारे माताएं कहती है कि इस व्रत को सिर्फ वही सुहागन महिलाएं करती हैं, कुंवारी कन्या इस व्रत को नहीं करती.

Chhath Puja 2023: छठ पूजा के आखिरी दिन उगते सूर्य को दिया गया अर्घ्य, महापर्व का हुआ समापन

Rajasthan News: आज छठ महापर्व का आखिरी दिन है. सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्‍य देकर छठ पर्व संपन्‍न हुआ. 4 दिन के इस पर्व की विशेष धूम बिहार और पूर्वांचल में देखने को मिलती है. वहीं देश-दुनिया के विभिन्‍न हिस्‍सों में बसे बिहार के लोगों ने भी छठ पर्व मनाया. राजस्थान के चूरू जिले में भी नहाय खाय से शुरू हुए आस्था के महापर्व छठ पूजा का सोमवार को चौथे दिन उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही समापन हो गया. 

सरदारशहर के बच्चा गेस्ट हाउस के पास छठ व्रत के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत के पारण का विधान है. चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन तप और व्रत के माध्यम से हर साधक अपने घर-परिवार और विशेष रूप से अपनी संतान की मंगलकामना करता है. बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत देश के तमाम हिस्सों में मनाया जाने वाला छठ पर्व छठी मैया और प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर की विशेष पूजा के लिए किया जाता है. 
भगवान भास्कर की महिमा तमाम पुराणों में बताई गई है. भगवान सूर्य एक ऐसे देवता हैं, जिनकी साधना भगवान राम और श्रीकृष्ण के पुत्र सांब तक ने की थी. सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक ग्रंथों में उगते हुए सूर्य देव की पूजा को अत्यंत ही शुभ और शीघ्र ही फलदायी बताया गया है, लेकिन छठ महापर्व पर की जाने वाली सूर्यदेव की पूजा एवं अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि छठ व्रत की पूजा से साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट पलक झपकते दूर हो जाते हैं और उसे मनचाहा वरदान प्राप्त होता है.

भले ही दुनिया कहती है कि जो उदय हुआ है, उसका डूबना तय है, लेकिन लोक आस्था के छठपर्व में पहले डूबते और बाद में दूसरे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का यही संदेश है कि जो डूबा है, उसका उदय होना भी निश्चित है, इसलिए विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्यपूर्वक अपना कर्म करते हुए अपने अच्छे दिनों के आने का इंतजार करें, निश्चित ही भगवान भास्कर की कृपा से सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलेगा.

बिहार निवासी युवती अंजली मंडल ने बताया कि इस पर्व पर खुशी इस बात की है यह पर्व भक्तिमय पर्व है. हमारी माताएं इस व्रत को करती हैं तो हमारा भी इच्छा होती है कि हम भी यह व्रत करें लेकिन हमारे माताएं कहती है कि इस व्रत को सिर्फ वही सुहागन महिलाएं करती हैं, कुंवारी कन्या इस व्रत को नहीं करती. अंजली मंडल ने बताया कि हम पहले कोई भी मनोकामना मांगते हैं और वह मनोकामना पूर्ण होने पर इस व्रत को किया जाता है. महिलाएं संतान प्राप्ति और पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को करती हैं.

सरदारशहर के बुच्चा गेस्ट हाउस के पास सोमवार अल सुबह बिहारी बन्धुओं ने धूमधाम के साथ छठ पूजा मनाई. इस मौके पर ज्यादात्तर बिहारी बन्धुओं ने उपवास रखा और नये कपड़े पहन कर बिहारी बन्धुओं ने भगवान सूर्य की पूजा अर्चना कर मन्नोतियां मांगी. महिलाओं व पुरुषों ने घाट बनाकर पानी में उतर कर भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की. इस अवसर पर बिहारी बन्धुओं ने भगवान सूर्य के नारियल, सभी प्रकार के फल एवं मिठाई चढाई और करीब दो घण्टे तक पूजा अर्चना की. पूजा स्थल को सजाकर भव्य रूप दिया गया. इस छठ पूजा देखने के लिए बिहारी बन्धुओं के अलावा स्थानीय लोगों की भीड़ देखी गई. यह कार्यक्रम सूर्य उदय तक चला. सोमवार सुबह बिहारी बंधुओ के पर्व को मनाने के लिए सभापति राजकरण चौधरी भी इनके बीच पहुंचे और छठ पूजा की शुभकामनाएं दी. इस अवसर पर बिहारी बंधुओ की ओर से भी सभापति राजकरण चौधरी का स्वागत किया गया. इस अवसर पर बिहारी बांधों के अलावा अन्य शहर वासियों ने भी पूजा स्थल पर पहुंचकर छठ पूजा की.

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