IPS ईश्वर लाल गुर्जर: 10वीं में फेल, हर सरकारी नौकरी में रिजेक्ट; 3 बार UPSC क्रेक सपनों को दी नई उड़ान

ईश्वर लाल गुर्जर, जो 10वीं क्लास में फेल हो गए थे और कई सरकारी नौकरियों में रिजेक्ट हुए थे, उन्होंने IPS बनने का अपना सफर कैसे तय किया? जानिए 6 कोशिशों की यह इमोशनल UPSC सक्सेस स्टोरी.

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IPS Ishwar lal Gurjar
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सान गिरता है, टूटता है, लेकिन जो उठकर फिर से चलना शुरू कर देता है, वही इतिहास लिखता है.' ...यह पंक्तियां राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के भाम्बरा का बाड़िया के रहने वाले IPS ईश्वर लाल गुर्जर (IPS Ishwar Lal Gurjar) पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं. स्कूल के दिनों में जो छात्र 10वीं की परीक्षा भी पास नहीं कर पाया था, जिसने एक के बाद एक कई सरकारी नौकरियों के इम्तिहानों में असफलता का स्वाद चखा,  कभी हार नहीं मानी. आखिरकार, अपने छठे प्रयास में यूपीएससी(UPSC) सिविल सेवा परीक्षा में शानदार रैंक हासिल कर उन्होंने अपना आईपीएस (IPS) बनने का सपना पूरा किया. हाल ही में IPS ईश्वर लाल गुर्जर की पोस्टिंग प्रयागराज में एसपी के तौर पर कार्यरत है. ईश्वर ने अपनी मेहनत से साबित कर दिया कि स्कूल का रिपोर्ट कार्ड आपकी काबिलियत तय कर सकता है, लेकिन आपका भविष्य नहीं.

Photo Credit: IPS ईश्वर लाल गुर्जर

 जब 10वीं के रिजल्ट ने तोड़ दिया था हौसला

अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि साल 2011 के जून महीने में जब 10वीं का रिजल्ट आया, तो ईश्वर लाल गुर्जर गणित और विज्ञान विषयों में फेल हो गए. एक महीने बाद सप्लीमेंट्री परीक्षा हुई, लेकिन बेसिक क्लियर न होने की वजह से वह दोबारा फेल हो गए. ईश्वर बताते हैं कि यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था. वह पूरी तरह टूट चुके थे और पढ़ाई छोड़ने का मन बना चुके थे.

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लेकिन इस मुश्किल समय में उनके पिता और स्कूल के पीटीआई (PTI) सर उनके साथ खड़े रहे. पिता ने कभी फेल होने पर ताना नहीं मारा, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला दिया. जब अगस्त 2011 में ईश्वर दोबारा 10वीं की कक्षा में बैठे, तो सहपाठियों की नजरें चुभती थीं. एक फेल छात्र पूरी क्लास के लिए मजाक था, लेकिन ईश्वर ने इस दर्द को सहा और अपने भीतर की आग को दबाए रखकर दुबारा इम्तिहान के लिए खुद को मजबूत बनाया. इसके लिए उन्होंने टॉपर्स से दोस्ती की, दिन-रात मेहनत की और अपनी कमजोरियों पर काम किया, जिसका नतीजा हुआ कि वह होशियार छात्रों की गिनती में आने लगे और उसी साल 10वीं को अच्छे अंकों से पास किया. 

IPS ईश्वर लाल गुर्जर का स्कूल जहां से उन्होंने पूरी की थी स्कूलिंग
Photo Credit: f

सरकारी नौकरी की भूख और लगातार असफलताएं

12वीं में 68% अंक हासिल करने के बाद, एक शिक्षक की मदद से उन्हें BSTC डिप्लोमा के बारे में पता चला, जिससे थर्ड ग्रेड टीचर बना जा सकता था. उस समय तक ईश्वर लाल गुर्जर को IAS या IPS के बारे में कोई जानकारी नहीं थी; उनके लिए एक अदद सरकारी नौकरी ही सबसे बड़ा लक्ष्य था. 

इसके लिए वह जयपुर टीचर के कोर्स का डिप्लोमा करने चले गए. क्योंकि सरकारी को पाने के लिए उन्हें रोजगार की जरूरत थी, जिससे वह अपने सपने को पंख दे सके. इसी नौकरी की चाहत में उन्होंने वनरक्षक, जेल प्रहरी, कॉन्स्टेबल और पटवारी सहित कई भर्तियों के फॉर्म भरे. ईश्वर हंसते हुए बताते हैं, "जिसने शुरुआत में ही असफलता देखी हो, वह एक बार में हर इम्तिहान कैसे पास कर सकता था?" नतीजा वही रहा- वह इन सभी परीक्षाओं में फेल हो गए.

पिता के साथ IPS Ishwar Lal Gurjar
Photo Credit: NDTV

 2018: वो पहली कामयाबी जिसने बदला सब कुछ

लगातार असफलताओं के बाद फरवरी 2018 में उम्मीद की एक नई किरण ने ईश्वर लाल गुर्जर की मेहनत को समझा. उन्होंने रीट (REET) प्राइमरी टीचर का एग्जाम दिया और 542वीं रैंक के साथ थर्ड ग्रेड टीचर के रूप में सिलेक्ट हो गए. इतनी सारी असफलताओं और 10वीं फेल का लगा टैग हटना उनके लिए  गड़े खजाने मिलने जैसा था. यह उनकी पहली सरकारी नौकरी थी, जिसने उनके कम होते मनोबल को एवरेस्ट जैसा मजबूत ऊंचा उठाने में मदद की. नौकरी मिलने के बाद उनकी शादी भी हो गई.

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IAS महेंद्रपाल गुर्जर
Photo Credit: Facebook

'सर, क्या मैं भी UPSC कर सकता हूं?

सरकारी टीचर की नौकरी के दौरान ही उन्हें भीलवाड़ा में IAS महेंद्रपाल गुर्जर से मिलने का मौका मिला, जो उस समय उन्ही इलाके में IAS के रूप में उनका सिलेक्शन हुआ था, जिसके लिए गांव में उनका सम्मान किया जा रहा था. उस मुलाकात में उन्हें उनसे बात करने का मौका मिला.जहां ईश्वर ने अपने दिल के कोने में दबे छुपे हुए सपने के बारे में उनसे बात कि,  ईश्वर ने डरते-डरते उनसे पूछा, 'सर, क्या मैं भी UPSC कर सकता हूं?' सरकारी नौकरी पाने के बाद उन्हें IAS , IPS जैसी प्रशासनिक सेवाओं के बारे में पता लगा. और उसे करने के लिए वह हमेशा से सोचने लगे. लेकिन एक मिथ के चलते वह अपने इस सपने को घर के कोने में रखे उस संदूक की भूल जाते है जिसे ताला लगा कर भुला दिया जाता था.  दरअसल, ईश्वर गुर्जर के मन में यह मिथक था कि सिविल सर्विस सिर्फ वही निकाल सकते हैं जिनकी अंग्रेजी मजबूत हो या जो बड़े कॉलेजों से पढ़े हों.

IAS महेंद्रपाल गुर्जर के घर के बाहर
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एक IAS से मुलाकात और एक शेर से बुन लिया UPSC का सपना

आयोजन में IAS महेंद्रपाल गुर्जर से हुई  उनकी मुलाकात ईश्वर लाल की जिंदगी का दूसरा डर्निंग प्वाइंट बनीं. जहां IAS महेंद्रपाल  ने उनकी हिम्मत बढ़ाते हुए एक बेहद खूबसूरत शेर सुनाया. उन्होंने कहा

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हुकमरानों ने फरमाया है कि नारों से बदलता है जमाना,  सियासतदां कहते हैं कि सियासतें बदलें तो बदलता है जमाना.  लेकिन मिज़ाज-ए-जहां बदलने को इतना कुछ काफी नहीं होता, बदलने वाला खुद बदले, तो बदलता है जमाना.

 IAS महेंद्रपाल के इस शेर को आज भी याद करते IPS ईश्वर लाल गुर्जर कहते है कि इन पंक्तियों ने उनपर जादू किया. लेकिन फिर भी कही न कही असफलता का डर अब भी उनके साथ चलता था, इसलिए उन्होंने UPSC करने की ठानी लेकिन सीधे सिविल सर्विस में बैठने के बजाय पहले स्टेट पीसीएस (RAS) का एग्जाम देने की सोची. जिसकी तैयारी उन्होंने शुरू की. 

2018 में RAS प्रीलिम्स क्लियर पर एक चूंक पड़ गई भारी

2018 में उन्होंने RAS प्रीलिम्स क्लियर भी कर लिया, लेकिन ओवर-कॉन्फिडेंस और सपनों की दुनिया में खो जाने के कारण वह मेंस की तैयारी ठीक से नहीं कर पाए और 40 नंबरों से चूक गए. इस झटके ने उन्हें दोबारा जमीन पर ला दिया.

ईश्वर का यूपीएससी का सफर चुनौतियों से भरा रहा. साल 2019 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन प्रीलिम्स में ही फेल हो गए. इसके बाद साल 2020 में उन्होंने दूसरी बार परीक्षा दी और इस बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गए, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना पाए. हालांकि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तीसरी बार भी एग्जाम दिया, लेकिन उनका ये प्रयास भी असफल रहा. इसके बाद उन्होंने चौथी बार भी परीक्षा दी और इस बार 644वीं रैंक के साथ पास हो गए. उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ.

IPS Ishwar lal gurjar
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छठे प्रयास में बने IPS अधिकारी

चूंकि ईश्वर गुर्जर आईपीएस बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 2023 में पांचवीं बार यूपीएससी परीक्षा दी और इस बार 555वीं रैंक के साथ सफल हुए, लेकिन इस बार भी उन्हें आईपीएस नहीं मिला. इसलिए उन्होंने 2024 में छठा अटेंप्ट दिया और इस बार उनका सपना पूरा हो गया. यूपीएससी में 483वीं रैंक के साथ वह आईपीएस अधिकारी बन गए.

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