क्या 10वीं कक्षा में फेल होने वाला कोई छात्र देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा UPSC क्रैक कर सकता है? सुनने में यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा लग सकता है, लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले ईश्वर लाल गुर्जर (IPS Ishwar Lal Gurjar) ने इसे सच कर दिखाया है.
एक ऐसा दौर भी है जब समाज उन्हें 'नाकाम' मान चुका था और वे खुद भी निराश थे, लेकिन आज वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक प्रभावशाली अधिकारी हैं. आइए जानते हैं फेलियर से लेकर खाकी वर्दी पहनने तक के उनके इस असाधारण सफर की पूरी इनसाइड स्टोरी.

Photo Credit: IPS ईश्वर लाल गुर्जर
तालाब में भैंस चराने से लेकर 'धौलपुर हाउस' के इंटरव्यू तक
भीलवाड़ा के एक छोटे से गांव 'भामर का बाड़िया' (ज्ञानगढ़) के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे ईश्वर का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा था. दादा-दादी के साथ रहने वाले ईश्वर बचपन में गांव के तालाबों में नहाना, भेड़-बकरी और भैंस चराने जैसे काम करते थे. उनके परिवार या गांव में शिक्षा का कोई खास माहौल नहीं था. वे अपने घर के पहले ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने 10वीं और 12वीं पास की और पूरे गांव से सरकारी नौकरी पाने वाले पहले व्यक्ति बने.

IPS ईश्वर लाल गुर्जर का स्कूल जहां से उन्होंने पूरी की थी स्कूलिंग
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जून 2011 बना जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
ईश्वर के जीवन में सबसे बड़ा झटका जून 2011 में लगा, जब 10वीं बोर्ड का रिजल्ट आया और वे फेल हो गए. उस समय वे पूरी तरह टूट चुके थे, लेकिन उनके किसान पिता सुवालाल गुर्जर ने उनका हाथ थामा और कहा कि हौसला मत हारो, कोशिश दोबारा करो.
पिता की इसी बात ने उनके भीतर की निराशा को ताकत में बदल दिया . और साल 2012 में दोबारा परीक्षा देकर 10वीं 54% अंकों के साथ पास की. इसके बाद उन्होंने बताया कि वह पढ़ाई के प्रति बेहद गंभार हो गए थे. उनकी गिनती होशियार छात्रों में होने लगी थी. इसी के चलते 12वीं में 68% अंकों के साथ स्कूल की पढ़ाई पूरी की. और फिर अजमेर की MDS यूनिवर्सिटी से BA (60% अंक) में ग्रेजुएशन पूरा किया.

पिता के साथ IPS Ishwar Lal Gurjar
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शिक्षक की नौकरी से UPSC क्रैक करने का सफर
अपनी मेहनत के दम पर ईश्वर ने साल 2018 में REET परीक्षा पास की और 2019 में एक सरकारी स्कूल में थर्ड-ग्रेड टीचर बन गए. लेकिन उनकी आंखों में सपने बड़े थे. इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं की तरफ रुख किया. वे राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के जरिए पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) और RAS (SDM) के लिए भी चुने गए, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य UPSC था.
UPSC का सफर भी उनका आसान नहीं था. साल 2019 में पहले प्रयास में वे प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाए. 2020 में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट से बाहर हो गए. 2021 में फिर असफलता हाथ लगी. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी, उन्होंने अपने सपनों की उड़ान को ऊंचा कर उसे अखिक्त बना लिया था.

IAS महेंद्रपाल गुर्जर
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लगातार 3 बार UPSC क्रैक करने का रिकॉर्ड
सरकारी टीचर की नौकरी के दौरान ही उन्हें भीलवाड़ा में IAS महेंद्रपाल गुर्जर से मिलने का मौका मिला, जो उस समय उन्ही इलाके में IAS के रूप में उनका सिलेक्शन हुआ था, जिसके लिए गांव में उनका सम्मान किया जा रहा था. उस मुलाकात में उन्हें उनसे बात करने का मौका मिला.जहां ईश्वर ने अपने दिल के कोने में दबे छुपे हुए सपने के बारे में उनसे बात कि, ईश्वर ने डरते-डरते उनसे पूछा, 'सर, क्या मैं भी UPSC कर सकता हूं?' सरकारी नौकरी पाने के बाद उन्हें IAS , IPS जैसी प्रशासनिक सेवाओं के बारे में पता लगा. और उसे करने के लिए वह हमेशा से सोचने लगे. लेकिन एक मिथ के चलते वह अपने इस सपने को घर के कोने में रखे उस संदूक की भूल जाते है जिसे ताला लगा कर भुला दिया जाता था. दरअसल, ईश्वर गुर्जर के मन में यह मिथक था कि सिविल सर्विस सिर्फ वही निकाल सकते हैं जिनकी अंग्रेजी मजबूत हो या जो बड़े कॉलेजों से पढ़े हों.
लगातार 3 बार UPSC क्रैक करने का रिकॉर्ड
| साल | UPSC सिविल सेवा परीक्षा परिणाम | AIR | आवंटित सेवा |
| 2022 | पहला सिलेक्शन | AIR 644 | IRS (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) |
| 2023 | दूसरा सिलेक्शन | AIR 555 | IPS (इंडियन पुलिस सर्विस) |
| 2024 | तीसरा और अंतिम प्रयास | AIR 483 | IPS (रैंक में सुधार) |
"शब्द वही हैं, बस साल और वक्त बदल गया है"
UPSC 2024 का रिजल्ट आने के बाद ईश्वर ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट लिखी थी, जो आज लाखों एस्पिरेंट्स के लिए प्रेरणा है.उन्होंने लिखा:
"शब्द वही हैं, बस साल और वक्त बदल गया है. इस बार UPSC CSE 2024 का रिजल्ट सामने है. साल 2020 से लेकर आज तक का यह सफर कई यादों और सबक से भरा है. शुरुआती असफलताओं के बाद लगातार तीन बार लिस्ट में अपना नाम देखना और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का हिस्सा बनने का गौरव पाना कोई छोटी बात नहीं है."
उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए ढाबों की चाय, दोस्तों के साथ और गुरुओं के आशीर्वाद को अपनी इस सफलता का असली हकदार बताया.
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