
Kota: शहरी क्षेत्र के वार्डों में नगर निगम की सुविधाओं को उपलब्ध करवा दी जाती है. लेकिन, जो गांव दूर है और निगम में शामिल हैं. वहां आज भी सुविधाओं का टोटा है. कोटा नगर निगम में भी हाल कुछ ऐसा ही है. कोटा उत्तर निगम के वार्ड-1 में शंभूपुरा गांव को शामिल किए हुए करीब 15 साल हो गए हैं. लेकिन, आज भी यहां के लोग शहरी सुविधाओं के साथ बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित हैं.
गांव में नहीं जाते सफाईकर्मी
यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है. क्योंकि, सफाई कर्मी गांव में जाते ही नहीं हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब से गांव वार्ड में शामिल हुआ है, किसी सफाईकर्मी को उन्होंने गांव में सफाई करते नहीं देखा. आलम यह है कि गांव में गंदगी का आलम है. सड़कों पर पानी भरा है, जिससे बीमारियों का अंदेशा हमेशा बना रहता है.
निगम नहीं करता मॉनिटरिंग
गांव वाले अपने स्तर पर ही सफाई करते हैं. नगर निगम ना तो सफाईकर्मियों कि गांव में मौजूदगी की मॉनिटरिंग करता है और ना ही शहर के वार्डों की तरह गांव में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इससे बढ़िया तो जब पंचायत में शामिल थे, तभी हालत ठीक थे. ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा था और विकास कार्यों के साथ बुनियादी सुविधाएं भी पंचायत स्तर पर उपलब्ध हो जाती थी.
गावं के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
इस पूरे मामले पर जब कोटा उत्तर निगम के उप महापौर से जानकारी ली गई तो उन्होंने वार्ड में लगाए गए सफाई कर्मियों के बारे में कागजी जानकारी दी, और कहा कि अगर गांव में सफाई कर्मी नहीं पहुंच रहे हैं, तो इसकी जांच करवाएंगे. कोटा नगर निगम में सफाई को लेकर करोड़ों रुपए का बजट है. लेकिन, यह बजट शहरी क्षेत्र में सफाई अभियानों तक ही सिमट कर रह जाता है. जिन गांवों को कुछ साल पहले निगम में शामिल किया गया है, वह आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. अब देखना होगा कि नगर निगम में गांव को तो शामिल कर लिया गया है. लेकिन, ग्रामीणों को शहरी क्षेत्र की वो तमाम सुविधाएं कब और कैसे उपलब्ध होगी. यह बड़ा सवाल है.
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