हनुमानगढ़ में रहस्यमय बीमारी से लगातार मर रहे हैं जानवर, क्या है मामला? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट

Mysterious Disease: हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र के गांव अमरपुरा, भिरानी, गढड़ा, मुंसरी में पिछले लगभग दो माह में सैंकड़ों जानवर किसी अज्ञात रहस्यमयी बीमारी से मौत हो चुकी है. ग्रामीण का दावा है कि मुंसरी गांव में रोजाना करीब 25 से 35 पशु इस बीमारी से अपनी जान गंवा रहे है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Mysterious Disease In Animals: हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र के कई गांवों में करीब दो माह से एक अज्ञात रोग के कारण पशुओं की मौत के आंकड़ों में लगातार इजाफा होता जा रहा है, जो ग्रामीण अंचल के कृषि और पशुपालन से जुड़े लोगों को बुरी तरह से प्रभावित किया है. एनडीटीवी राजस्थान टीम ने भयावह मंजर को लेकर ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पशुपालकों और ग्रामीणों से बात की.

हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र के गांव अमरपुरा, भिरानी, गढड़ा, मुंसरी में पिछले लगभग दो माह में सैंकड़ों जानवर किसी अज्ञात रहस्यमयी बीमारी से मौत हो चुकी है. ग्रामीण का दावा है कि मुंसरी गांव में रोजाना करीब 25 से 35 पशु इस बीमारी से अपनी जान गंवा रहे है.

ग्रामीणों और पशुपालकों में पशुओं की लगातार हो रही मौतों को लेकर पशु पालन विभाग और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश साफ नजर आया. ग्रामीणों का आरोप है कि मध्य जनवरी से अब तक अकेले मुंसरी गांव में 500 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है, और अभी भी मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई प्रशासनिक अधिकारी तो छोड़ो पटवारी तक ने पशुपालकों की विपदा की सुध लेने की जहमत तक नहीं उठाई है.

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एक पशुपालक मुताबिक रहस्यमयी बीमारी से उसके संयुक्त परिवार के 6 दुधारू पशु अभी तक अपनी जान गंवा चुके हैं. पशुपालन कर गांव में दूध बेचने वाला पशुपालक अब पड़ोस से दूध खरीदने को मजबूर हैं.

पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि पशु पालन विभाग को मामले की सूचना लगभग 10 दिन पहले दी गई, लेकिन पिछले दो दिन पूर्व ही चिकित्सकों ने पशुओं को दवा देना शुरू किया है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाता तो पशुओं की मौत के लगातार बढ़ते आंकड़े पर पहले ही विराम लगाया जा सकता था.

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बुधवार को मुंसरी पहुंचे पूर्व भादरा विधायक बलवान पूनिया ने पशुपालकों को पशुपालकों को पशुधन के नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि रहस्यमयी रोग से पशुपालकों की कमर तोड़ दी है, सरकार को पशुपालकों को मुआवजा देकर राहत प्रदान करना चाहिए.

गांव में कार्यरत वेटरनरी डॉक्टर मुकद्दर अली का कहना है कि विभागीय आंकड़ों के अनुसार गांव में कुल पशुओं की संख्या 2200 है, जिनमे से 1500 पशुओं के टीकाकरण कर दिया गया है, जिसमें से करीब 170 पशुओं की मौत हो चुकी है, जबकि अभी आसपास की कई ढाणियों का टीकाकरण किया जाना बाकी है.

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चिकित्सक अली के अनुसार स्थिति अभी नियंत्रण में है. उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे टीकाकरण किया जा रहा है, पशुओं के मौत के आंकड़ों और नए मामले आने कम हुए हैं. उन्होंने बताया कि मृत पशुओं के सैंपल लैब में भेजे हुए है, रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा कि आखिर यह रहस्यमयी बीमारी का पता लग सकेगा.

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