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This Article is From Jan 21, 2026

अरावली पर बनेगी एक्सपर्ट कमेटी, राज्य सरकार को खरी-खरी; सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?

सीजेआई ने कहा कि अवैध खनन को रोकना होगा, यह एक अपराध है. कोर्ट और कड़ी निगरानी पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा, "हम एक कमेटी बनाएंगे, जिसमें अपने-अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट होंगे.

अरावली पर बनेगी एक्सपर्ट कमेटी, राज्य सरकार को खरी-खरी; सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?
अरावली पर बनेगी एक्सपर्ट कमेटी

Aravali News: अरावली विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को फिर सुनवाई हुई. कोर्ट ने राज्य सरकार को अरावली में किसी भी अवैध खनन गतिविधि पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक यथास्थिति को बनाए रखने का आदेश दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अरावली की परिभाषा, विस्तार और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपने 29 दिसंबर 2025 के आदेश में उठाए गए सभी पहलुओं की समग्र जांच के लिए एक नई विशेषज्ञ समिति नियुक्त करेगा.

कमेटी बनाने के निर्देश

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं. सीजेआई ने कहा कि कोर्ट और कड़ी निगरानी पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा, "हम एक कमेटी बनाएंगे, जिसमें अपने-अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट होंगे. यह कमेटी अरावली को लेकर रिपोर्ट देगी. कमेटी कोर्ट के निर्देश और गाइडेंस में काम करेगी.

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह कोई प्रतिद्वंद्वी (adversarial) मुकदमा नहीं है, बल्कि उद्देश्य अरावली पर्वतमाला का संरक्षण करना है. शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि प्रस्तावित कमेटी का गठन नामों के शॉर्टलिस्ट किए जाने के बाद किया जाएगा, जिसके लिए कोर्ट ने अमीकस क्यूरी और भारत सरकार को उपयुक्त नाम सुझाने का निर्देश दिया है. 

राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस ओका बेंच के 2024 के आदेशों के बावजूद खनन पट्टे दिए जा रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं. उन्होंने इस पर रोक की मांग की.

अवैध खनन को रोकना होगा- सीजेआई

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चिंता जताई और कहा कि अवैध खनन को रोकना होगा, यह एक अपराध है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों से कहा कि आपको अपनी मशीनरी को काम में लाना होगा, क्योंकि अवैध खनन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से कहा कि वह सुनिश्चित करें कि कोई गैरकानूनी खनन न हो. राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान कार्यवाही को प्रतिकूल या क्रमिक मुकदमेबाजी (serial litigation) के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. 

कोर्ट ने सभी पक्षकारों से पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और माइनिंग एक्सपर्ट्स के नामों को लेकर सुझाव मांगे. सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट किया कि 'जंगलों' और 'अरावली' को परिभाषित करने के सवाल की जांच अलग से की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि दोनों मुद्दे अलग-अलग चिंताएं उठाते हैं और उन पर अलग से विचार करने की जरूरत होगी. जब एमिकस अपना नोट जमा कर देंगे, तब इस मामले पर सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को अरावली की परिभाषा पर एक विस्तृत नोट फाइल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की परिभाषा में बदलाव से जुड़े अपने पिछले निर्देशों को रोक दिया था.

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