बाड़मेर के तेल क्षेत्र में काला धुआं बना खतरा, ग्रामीणों ने उठाए पर्यावरण पर सवाल

राजस्थान में बाड़मेर के तेल उत्खनन क्षेत्र में गैस फ्लेयरिंग से उठता घना काला धुआं अब ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है. लोगों ने आंखों में जलन और सांस की समस्या की शिकायत की है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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बाड़मेर के तेल उत्खनन क्षेत्र में गैस फ्लेयरिंग से उठता घना काला धुआं अब ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया है

Rajasthan News: राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में तेल और गैस उत्पादन क्षेत्र से उठता काला धुआं चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां केयर्न वेदांता द्वारा वर्ष 2009 से क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस का उत्खनन किया जा रहा है. लेकिन प्राकृतिक गैस पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने पर कंपनी फ्लेयरिंग प्रक्रिया के तहत गैस को ऊंची चिमनियों से जला रही है.

चिमनियों से उठता काला गुबार

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन चिमनियों से लगातार घना काला धुआं निकलता है जो दिन में भी साफ दिखाई देता है. यह धुआं आसमान में दूर तक फैल जाता है और आसपास के गांवों की हवा को प्रभावित कर रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि यदि उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण सही तरीके से काम नहीं कर रहे तो यह पर्यावरण मानकों का उल्लंघन हो सकता है.

स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

गांवों में रहने वाले लोग आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं. कई परिवारों का कहना है कि बच्चों को आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना पड़ रहा है. ग्रामीणों को डर है कि अगर यही स्थिति रही तो लंबे समय में गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं.

शिकायतों के बाद भी ठोस कदम नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कंपनी और प्रशासन को कई बार शिकायत दी है. हर बार आश्वासन मिलता है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखती. इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.

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जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित विभागों से साइट पर जांच की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरण कृषि और जन स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ेगा. प्रशासन से उम्मीद है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द जांच कर उचित समाधान निकाला जाएगा ताकि क्षेत्र में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हो सके.

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