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बाड़मेर की रैली ने सुलगाई कांग्रेस की सियासत! पायलट के दौरे से रेगिस्तान का पारा हाई; अब गहलोत की होगी एंट्री

बाड़मेर-बालोतरा जिला सीमांकन के विरोध में हुई कांग्रेस की रैली में गहलोत के करीबी नेता नदारद रहे. जबकि सचिन पायलट ने खुद इलाके में दौरे किए और कार्यकर्ताओं से संपर्क किया.

बाड़मेर की रैली ने सुलगाई कांग्रेस की सियासत! पायलट के दौरे से रेगिस्तान का पारा हाई; अब गहलोत की होगी एंट्री
फाइल फोटो

बाड़मेर के धोरीमन्ना में जन आक्रोश रैली ने कांग्रेस की आंतरिक सियासत को गरमा दिया. इस रैली में अशोक गहलोत और सचिन पालयट गुट के तेवर का अलग-अलग आंकलन किया जा रहा है. बाड़मेर-बालोतरा जिला सीमांकन के विरोध में रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, हेमाराम चौधरी, हरीश चौधरी और सांसद उमेदाराम बेनीवाल जैसे बड़े नेता शामिल हुए. लेकिन गहलोत गुट के स्थानीय वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अमीन खान और पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने दूरी बनाई. रैली के बाद नेताओं के बाड़मेर दौरे ने पार्टी के अंदर गुटबाजी की आग को और भड़का दिया है. डोटासरा और जूली ने सर्किट हाउस में मेवाराम जैन, अमीन खान समेत कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव की तैयारियां तेज करने का आह्वान किया. 

पायलट ने कार्यकर्ताओं से की अपील

वहीं, रैली के बाद शाम होते-होते सचिन पायलट सीधे बाड़मेर पहुंच गए और अपने समर्थकों के बीच जाकर 'नब्ज' टटोली. उन्होंने एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ और निर्मल चौधरी के साथ आजाद सिंह राठौड़ के कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने का जोरदार आह्वान किया. इसके बाद महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव शमा बानो के घर पहुंचे, जहां उनके पति और पूर्व मंत्री गफूर अहमद से मुलाकात कर हालचाल जाना. इस लंबी राजनीतिक मंत्रणा के बाद पायलट ने बायतू विधायक हरीश चौधरी के साथ भी मंथन किया.

गहलोत भी जल्द कर सकते हैं दौरा

दरअसल, सीमांकन के विरोध में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमाराम चौधरी धरने पर बैठे थे. चौधरी गहलोत के धुर विरोधी और पायलट के गुट के अगुवा माने जाते हैं. इसी वजह से रैली को गहलोत गुट की अनुपस्थिति और पायलट के दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है. फिलहाल, इन सब घटनाक्रम के चलते थार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.

सुगबुगाहट इस बात को लेकर भी है कि जल्द ही अशोक गहलोत खुद बाड़मेर का दौरा कर सकते हैं. उनके समर्थक तैयारी में भी जुट गए हैं. यह घटनाक्रम अब सिर्फ जिला सीमांकन विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों और 2028 की तैयारी की सियासी जंग का रूप भी ले चुका है. 

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