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This Article is From Feb 17, 2026

कोटा के लापता तालाब का मुद्दा सदन में गूंजा, सरकार ने 101 करोड़ से संरक्षण का किया ऐलान

स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आश्वस्त किया है कि प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों को जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए आदेश जारी किए जाएंगे.

कोटा के लापता तालाब का मुद्दा सदन में गूंजा, सरकार ने 101 करोड़ से संरक्षण का किया ऐलान
कोटा में लापता तालाब का सदन में उठा मुद्दा (तस्वीर बरसात के मौसम की है)

राजस्थान के कोटा शहर में कभी 19 तालाब हुआ करते थे, जो बरसाती पानी को समेटकर शहर को बाढ़ से बचाते थे और भूजल स्तर बनाए रखते थे. इन तालाबों की संख्या घटकर 12 रह गई है. कोटा के लापता तालाबों का मुद्दा विधानसभा में उठने के बाद सरकार अब हरकत में है. स्वायत्त शासन मंत्री ने 5 तालाबों के संरक्षण पर 101 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया है और अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दे दिए हैं. विधानसभा में इसका मुद्दा उठने के बाद पर्यावरण प्रेमियों ने स्वागत किया है, लेकिन आशंका भी जताई है कि कहीं यह सिर्फ घोषणा बनकर न रह जाए. उनका कहना है, जो तालाब खत्म हो चुके हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने की ठोस योजना बने. 

700 साल पुरानी जल विरासत का उठा मुद्दा

वाटर मैनेजमेंट की रियासतकालीन तकनीक जिसके तहत कोटा में तालाबों का निर्माण कर पठारी क्षेत्र से आने वाले पानी का संरक्षण किया जाता था. वह तालाब गुमनाम हो गए हैं, लेकिन अब 700 साल पुरानी जल विरासत का मुद्दा राजस्थान की विधानसभा में गूंजा है. कोटा विधायक संदीप शर्मा ने सदन में कहा कि रियासत काल में बनाए गए 19 तालाब शहर की जल सुरक्षा की रीढ़ थे. पठारी इलाकों से आने वाला बरसाती पानी इन्हीं तालाबों में सहेजा जाता था, लेकिन वक्त के साथ 12 तालाब खत्म हो गए.

कहीं अतिक्रमण हुआ, कहीं कॉलोनियां काट दी गईं तो कहीं बरसाती नालों पर ही प्लॉट बसा दिए गए. विधायक ने चेताया कि तालाबों के नष्ट होने से ही बारिश के दिनों में कोटा में बाढ़ जैसे हालात बनते हैं और भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर चुका है. मुद्दा जब विधानसभा में उठा तो स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जवाब में बताया कि 19 तालाबों की वर्तमान स्थिति की जांच करवाई जा रही है. सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए सीमांकन होगा और अतिक्रमण हटाए जाएंगे. 

इन 5 तालाबों का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया

  • महुआ तालाब
  • कोठी कलाम
  • रानी सागर तालाब
  • झेला तालाब
  • रामकुंड तालाब
     

रिकॉर्ड खोजने की प्रक्रिया शुरू

सरकार का कहना है कि रिकॉर्ड खोजने और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. रंगबाड़ी तालाब के संरक्षण के लिए 6.50 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है. जबकि दौलतगंज तालाब के जीर्णोद्धार व डायवर्जन चैनल पर 150 करोड़ से अधिक खर्च होगा. रानपुर तालाब का 7.7 करोड़ से जीर्णोद्धार व डायवर्जन चैनल का निर्माण होगा. काला तालाब की सुरक्षा दीवार पर 3.25 करोड़ खर्च होंगे. किशोर सागर तालाब के 82.31 करोड़ के सौंदर्यीकरण कार्य का वर्क ऑर्डर जारी किये गए हैं. 

सरकार की घोषणा के बाद पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि जो तालाब खत्म हो चुके हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने की ठोस योजना बने. अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाए. बचे हुए तालाबों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित किया जाए. पर्यावरण प्रेमियों ने यह भी कहा कि जब तालाब धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे, तब किसी सरकारो ने गंभीरता नहीं दिखाई. हालांकि अब भी “देर आए दुरुस्त आए” की उम्मीद बाकी है. 

जल स्रोतों को बचाने की मुहिम शुरू करेगी सरकार

कोटा की पहचान सिर्फ शिक्षा नगरी के रूप में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक जल प्रबंधन प्रणाली के लिए भी रही है. अगर तालाबों का पुनर्जीवन और संरक्षण समय रहते नहीं हुआ तो बाढ़, जलभराव और गिरता भूजल स्तर आने वाले वर्षों में और गंभीर संकट बन सकता है. राजस्थान सरकार अब पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और बचाने की मुहिम दोबारा शुरू करने की बात कही है. स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आश्वस्त किया है कि प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों को जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए आदेश जारी किए जाएंगे.

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