विज्ञापन

LPG सिलेंडर की किल्लत में देश परेशान, लेकिन राजस्थान का यह गांव बेफिक्र; बिना रोकटोक मिल रही गैस

मोतीपुर पंचायत में करीब 200 परिवार हैं, लेकिन यहां घरों व बाड़ों में सबके पर्सनल बायोगैस प्लांट लगे हैं. घर में बायो गैस प्लांट लगाए हुए आज 4 साल से भी ज्यादा हो गए. इस दौरान एक भी एलपीजी सिलेंडर घर लाने की जरूरत नहीं पड़ी.

LPG सिलेंडर की किल्लत में देश परेशान, लेकिन राजस्थान का यह गांव बेफिक्र; बिना रोकटोक मिल रही गैस

ईरान-इजरायल युद्ध का असर भारत की रसोई गैस आपूर्ति पर दिखने लगा है. रसोई गैस के उभरते संकट के दौर में भीलवाड़ा का एक गांव ऐसा है, जहां रसोई के चूल्हे एलपीजी से नहीं, बल्कि गाय के गोबर से चलते हैं. गांव रसोई गैस के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर है. करीब 120 घरों की बस्ती वाले मोतीपुरा गांव में गोबर गैस प्लांट है. यहां के ग्रामीणों के लिए न गैस बुकिंग करने का झंझट है, न ही किसी को एक सिलेंडर के लिए कतार में लगने की जरूरत है. भीलवाड़ा डेयरी की मदद से भीलवाड़ा जिले में करीब 773 बायोगैस प्लांट लगे हैं. जिससे सीधे-सीधे 800 परिवारों की गैस की आपूर्ति इन बायोगैस प्लांट से पूरी हो रही है. रसोई गैस के मामले में आदर्श बने मोतीपुर गांव में 4 साल में कभी एलपीजी सिलेंडर नहीं आए है. अब गैस की किल्लत के कारण जहां देश भर में गैस की फिजूल खर्ची रोकी जा रही है. ग्रामीण अंचलों में फिर वापस परंपरागत लकड़ी के चूल्हे चलने लगे हैं. वहीं, पूरे गांव वाले बिना किसी रोकटोक या कंजूसी के गैस इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां न सिलेंडर खत्म होने का डर है न बुकिंग का कोई झंझट है.

गांव पंचायत में करीब 200 परिवार

गांव के पूरन मल गोस्वामी ने कहा कि हमारी मोतीपुर पंचायत में करीब 200 परिवार हैं, लेकिन यहां घरों व बाड़ों में सबके पर्सनल बायोगैस प्लांट लगे हैं. घर में बायो गैस प्लांट लगाए हुए आज 4 साल से भी ज्यादा हो गए. इस दौरान एक भी एलपीजी सिलेंडर घर लाने की जरूरत नहीं पड़ी. वही परिवार में 8 सदस्य हैं, सभी का खाना इसी से बनता है. परिवार का खाना बनाना हो, पानी गर्म करना हो या दुधारू जानवरों के लिए पशु आहार बनाना हो, सारे काम इस प्लांट की मदद से हो जाते हैं. कभी-कभी इतनी गैस बनती हैं कि चाहें तो पड़ोसी को भी इसकी सप्लाई कर सकते हैं. मेहमान आ जाए या घर में कोई बड़ा फंक्शन हो, तब भी LPG सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती.

120 ग्रामीणों के लिए बना बायोगैस प्लांट

गोपाल ने बताया कि सरकार की मदद से ये गोबर गैस प्लांट लगाए हैं, ये हम किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं. गांव के युवा छोटू लाल बडला का कहना है कि गैस के अलावा इससे खाद भी बनती है, जो खेतों में फसलों के लिए बहुत ही बेहतरीन और उत्पादन बढ़ाने वाली होती है. इस खाद से फसलों में कोई रोग भी नहीं लगता है. दरअसल, एक बायो गैस प्लांट लगाने का खर्च 40 हजार रुपए था. इसमें 30 हजार रुपए की सब्सिडी मिल गई, वहीं बाकी के 10 हजार रुपए भी हजार रुपए महीना किस्त से लिए गए. इस स्कीम में तब करीब 120 ग्रामीणों के यहां ये बायो गैस प्लांट लगे हैं. जैविक खाद के लिए आधुनिक प्लांट बायोगैस प्लांट से निकलने वाले वेस्ट से जैविक खाद बनाने के लिए गांव की डेयरी सहकारी समिति ने सरकार से करीब दो हैक्टेयर जमीन को 99 साल की लीज पर लिया. इसके लिए सभी रकम सोसाइटी ने दी. 

गांव की युवा देवराज जाट ने बताया कि भीलवाड़ा डेयरी (भीलवाड़ा दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड) के सहयोग से जैविक खाद प्लांट यहां लगाया गया. अब इस प्लांट से गांव के 5 लोगों को रोजगार भी मिला है. गांव का एक ट्रेक्टर भी कॉन्ट्रैक्ट पर लगा हुआ है. भीलवाड़ा डेयरी के वरिष्ठ सहायक संदीप दाधीच ने बताया कि बायो वेस्ट से जैविक खाद बनाने का प्लांट पूरी तरह से वैज्ञानिक है. आधुनिक मशीनों से जैविक खाद तैयार पैकिंग की जाती है. मार्केट में इस जैविक खाद का 25 किलो का एक बैग 375 रुपए के हिसाब से बेचा जाता है. इस जैविक खाद की डिमांड भी अच्छी है.

यह भी पढ़ें- क्या पंजाब रोक सकता है राजस्थान का पानी, कितना मजबूत है भगवंत मान का रॉयल्टी वाला दावा?

Rajasthan.NDTV.in पर राजस्थान की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार, लाइफ़स्टाइल टिप्स हों, या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें, सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Close