Bhiwadi Fire: भिवाड़ी फैक्ट्री हादसे में चौंकाने वाली बात सामने आई है. कागजों में इस फैक्ट्री में कपड़ा बनाने की मंजूरी दी गई थी, जबकि हकीकत कुछ और है. प्रशासन के मुताबिक, गारमेंट वर्क्स के लिए स्वीकृत फैक्ट्री में कुछ और ही काम चल रहा था. जब इस संबंध में जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला से सवाल पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमारा पहला शक था कि कहीं कोई गैस रिसाव या केमिकल लीक तो नहीं हुआ है. वो अभी क्लियर हो गया है. फैक्ट्री रेडीमेड गारमेंट के लिए लगाई गई थी, लेकिन उसके अंदर कुछ और ही हो रहा था. यही नहीं, घटनास्थल से जले हुए पटाखे भी मिले हैं. मौके पर मौजूद NDTV की टीम को स्थानीय लोगों ने बताया कि इस फैक्ट्री में पटाखे बनाए जाते थे और यह बात पूरे इलाके में सबको पता थी.
फैक्ट्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी- डीएम
डीएम ने बताया, "फैक्ट्री किस चीज की थी और यहां स्पष्ट तौर पर क्या काम हो रहा था, इसकी भी जांच होगी. एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. फैक्ट्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी."
मैनेजर और मालिक से जानकारी लेगा प्रशासन
उन्होंने कहा कि देखकर ऐसा लग रहा है कि कोई छोटा विस्फोटक मटेरियल है. इस संबंध में फैक्ट्री के मैनेजर और मालिक को बुलाया गया है. उनसे जानकारी ली जाएगी. प्रशासन मृतक के बारे में जानकारी जुटा रहा है. साथ ही उन्होंने बताया कि मैनेजर के हवाले से फैक्ट्री में 9 मजदूरों के नियमित तौर पर काम करने की जानकारी मिली है.
"7 शव रिकवर, पूरी तरह कंकाल बन चुके थे"
मौके पर पहुंचे फायर इंचार्ज नरेश मीणा ने भी कपड़ा फैक्ट्री की आड़ में अन्य काम संचालित होने की ही बात कही. मीणा ने बताया कि इसमें रह-रहकर, बार-बार ब्लास्ट हो रहा था. फैक्ट्री कागजों में कुछ और थी, हकीकत में कुछ और काम चल रहा था. इसमें दीवाली पर पटाखे बन रहे थे. जबकि रिकॉर्ड में गारमेंट फैक्ट्री थी. फिलहाल 7 शव भी रिकवर किए गए हैं. सभी शव बिल्कुल कंकाल हो चुके थे.
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