राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर रेल मंडल भारतीय रेलवे की एसी ट्रेनों में बेडरोल चोरी के मामलों में देश के सबसे खराब प्रदर्शन वाले मंडलों में शामिल हो गए हैं. आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच बीकानेर रेल मंडल में 25.76 लाख और जोधपुर रेल मंडल में 8.09 लाख बेडरोल आइटम चोरी हुए. बीकानेर इस मामले में देशभर के 69 रेल मंडलों में पहले स्थान पर रहा जबकि जोधपुर टॉप-5 में शामिल है.
आरटीआई से मिली एक जानकारी के अनुसार इस अवधि में देशभर में 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम गायब हुए. इनमें बेडशीट, कंबल, तौलिया, तकिया और तकिया कवर शामिल हैं. इन चोरियों से ठेकेदारों को 104.51 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ.
बीकानेर में सबसे ज्यादा बेडशीट चोरी
रिपोर्ट के मुताबिक बीकानेर रेल मंडल में चोरी हुए 25.76 लाख सामानों में 12.42 लाख बेडशीट शामिल हैं जो कुल चोरी का लगभग आधा हिस्सा हैं. वहीं जोधपुर रेल मंडल में सबसे ज्यादा 3.40 लाख से अधिक कंबल गायब हुए जो वहां हुई कुल चोरी का करीब 42 प्रतिशत है.
बीकानेर रेल मंडल में बेडरोल चोरी के मामलों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. वर्ष 2022 में जहां करीब 2.99 लाख सामान चोरी हुए थे, वहीं यह संख्या बढ़कर 12.34 लाख तक पहुंच गई. यानी तीन साल में चोरी के मामलों में करीब चार गुना वृद्धि हुई. जोधपुर में भी इसी अवधि में चोरी के मामलों में 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
जयपुर में सबसे ज्यादा गायब हुए तौलिए
रिपोर्ट के अनुसार जयपुर रेल मंडल भी इस समस्या से अछूता नहीं है. यहां 2.52 लाख फेस टॉवल चोरी हुए जो मंडल में चोरी हुए कुल सामान का 56 प्रतिशत है. राष्ट्रीय स्तर पर भी सबसे ज्यादा चोरी फेस टॉवल की हुई. चार वर्षों में देशभर से 46.54 लाख तौलिए, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख तकिया कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए गायब हुए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि चोरी का सबसे बड़ा असर कोच अटेंडेंट और बेडरोल ठेकेदारों पर पड़ रहा है. रेलवे पहले चोरी हुए सामान की कीमत ठेकेदारों के भुगतान से काटता है और कई मामलों में ठेकेदार यह राशि कर्मचारियों के वेतन से वसूल लेते हैं. अटेंडेंट्स के वेतन से हर महीने 2,000 से 3,000 रुपये तक की कटौती होने की बात सामने आई है.
रेलवे ने शुरू किए रोकथाम के उपाय
रेल मंत्रालय ने बेडरोल चोरी रोकने के लिए ट्रेनों में सीसीटीवी निगरानी, कोच मित्र ऐप, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन और यात्रियों से स्टेशन पहुंचने से पहले बेडरोल वापस लेने जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं. इसके बावजूद बीकानेर और जोधपुर रेल मंडलों के आंकड़े रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
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