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This Article is From Feb 16, 2026

Rajasthan: एमपी से तीसरी बार बारां पहुंचा चीता KP2, अब 'परमानेंट घर' देने की तैयारी में राजस्थान सरकार!

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर बार-बार राजस्थान की सीमा में दाखिल हो रहे चीता KP2 ने दोनों राज्यों के वन विभागों के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है. यह चीता तीसरी बार मध्य प्रदेश की सरहद लांघकर राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद और किशनगंज वन क्षेत्र में पहुंच गया है.

Rajasthan: एमपी से तीसरी बार बारां पहुंचा चीता KP2, अब 'परमानेंट घर' देने की तैयारी में राजस्थान सरकार!
Cheetah KP2 News
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Cheetah KP2 News:  मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर बार-बार राजस्थान की सीमा में दाखिल हो रहे चीता KP2 ने दोनों राज्यों के वन विभागों के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है. यह चीता तीसरी बार मध्य प्रदेश की सरहद लांघकर राजस्थान के बारां जिले के शाहबाद और किशनगंज वन क्षेत्र में पहुंच गया है. खास बात यह है कि इस बार राजस्थान सरकार उसे वापस भेजने के बजाय, उसके लिए यही एक सुरक्षित'नेचुरल कॉरिडोर'विकसित करने पर विचार कर रही है. क्योंकि दो बार इस चीता को मध्यप्रदेश वन विभाग की टीमें ट्रेंकुलाइज करके यहां से लेकर चली गई थी. इस बात का विरोध हाडौती के वाइल्डलाइफरों ने किया और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन तक इस बात को पहुंचाया भी है. 

 बार-बार राजस्थान आ रहा KP2

चीता KP2  दिसंबर 2025 में यह चीता करीब 15 दिनों तक राजस्थान के जंगलों में रहा था. अब तक दो बार मध्य प्रदेश की टीमें इसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर वापस ले जा चुकी हैं, लेकिन हर बार यह नर चीता खुद चलकर वापस बारां के जंगलों में पहुंच जाता है. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि राजस्थान की आबोहवा और शाहबाद का घना जंगल इस चीते को बेहद रास आ रहा है.

उसके रूट को समझने की कोशिश की जा रही है

रविवार को बारां प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान उनसे पूछे गए सवाल चीता को बार-बार ट्रेंकुलाइज करके राजस्थान से मध्यप्रदेश नहीं लेकर जाए? इस सवाल पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि इस संबंध में बात करेंगे .उन्होंने कहा कि चीते के बार-बार आने से यह साफ है कि वह यहां खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है. चीता अपने नेचुरल रूट से यहां आ रहा है. हम वन विभाग से बातचीत कर रहे हैं ताकि उसके रूट को समझा जा सके. अगर वह खुद यहां रहना चाहता है, तो उसके संरक्षण के लिए कॉरिडोर विकसित किया जाएगा. एक राज्य से दूसरे राज्य में आने पर वन्यजीव को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

14 फरवरी से जामली वन खंड में डेरा

वर्तमान में यह चीता KP2 जामली वन खंड में मौजूद है. 14 फरवरी से ही दोनों राज्यों की वन टीमें उसकी सैटेलाइट और जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग कर रही हैं. वन विभाग अब इस बात का अध्ययन कर रहा है कि क्या शाहबाद और किशनगंज के जंगलों को चीतों के लिए एक स्थाई आवास के रूप में विकसित किया जा सकता है.

Report By: Arjun Arvind

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