राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव में देरी, फिर से हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पूर्व विधायक ने लगाई याचिका

राजस्थान हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 तक राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था. इसके बावजूद अब तक चुनाव कराने को लेकर प्रक्रिया में तेजी नहीं आई है. अब फिर से चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई है.

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पंचायत-निकाय चुनाव में देरी का फिर से हाईकोर्ट पहुंचा मामला

राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर मामला एक बार फिर न्यायालय पहुंच गया है. निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव नहीं कराए जाने पर हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की गई है. याचिका में बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव करवाए जाने की प्रक्रिया नहीं पूरी की जा रही है. यह याचिका सिरोही के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने दायर की है. सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला लेकर चुनाव नहीं टाले जा सकते हैं.

31 जुलाई तक चुनाव कराने का था आदेश

दरअसल, हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को अपने आदेश में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि ग्राम पंचायतों और नगर निकायों सहित सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जुलाई 2026 तक संपन्न कराए जाएं. हालांकि, अब तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है. याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है.

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अदालत ने अपने पूर्व आदेश में नगरीय निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून 2026 तक पूरा करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन वर्तमान में पंचायतों और शहरी निकायों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. इस बीच, स्वायत्त शासन विभाग ने 15 जून को ओबीसी आयोग के सचिव को पत्र लिखकर नगरीय निकायों में अति पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित जानकारी मांगी थी.

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव में देरी

पत्र में कहा गया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग के लिए आरक्षण की अंतिम जानकारी ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा सकेगी. याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चुनाव कराए जाएं और रिपोर्ट में देरी को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता. इसके बावजूद राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का हवाला दे रहे हैं.

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