Jodhpur News: राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) ने एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए बीकानेर (Bikaner) के एक पीड़ित परिवार को तत्काल और प्रभावी पुलिस सुरक्षा (Police Protection) मुहैया कराने का कड़ा आदेश दिया है. मामला राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी संजय बोथरा (Sanjay Bothra RPS) और कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा (Rohit Godara) से जुड़ी धमकियों से भरा है, जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 2016 से शुरू हुआ था, जब याचिकाकर्ता अल्ताफ बानो (Altaf Bano) के परिवार के सदस्यों को तत्कालीन थाना अधिकारी संजय बोथरा (वर्तमान में डिप्टी एसपी, ट्रैफिक, अजमेर) द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई. बीकानेर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 2018 में इस मामले में संजय बोथरा के खिलाफ अपराधों पर संज्ञान लिया था. जब ट्रायल कोर्ट में अभियोजन पक्ष के सबूतों का चरण आया, तो आरोप है कि अधिकारी ने कानूनी परिणामों से बचने के लिए याचिकाकर्ताओं पर 'समझौता' करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.
गैंगस्टर रोहित गोदारा की एंट्री
याचिका में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि अधिकारी के इशारे पर कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा ने याचिकाकर्ता इमरान खान को व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकियां दीं. 20 और 21 दिसंबर 2025 को रोहित गोदारा ने मोबाइल नंबर +35192464922 से इमरान खान को कॉल किया. गैंगस्टर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर संजय बोथरा के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को वापस नहीं लिया गया, तो इसके परिणाम 'अपरिवर्तनीय' और घातक होंगे.
'भक्षक नहीं बन सकता रक्षक'
जस्टिस फरजंद अली ने 12 फरवरी 2026 को इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि जब राज्य की मशीनरी खुद स्वीकार कर रही है कि पीड़ितों को गैंगस्टर से खतरा है, तो सुरक्षा देना विवेकाधीन नहीं, बल्कि अनिवार्य कर्तव्य है. कोर्ट ने कहा, 'जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता का सिस्टम से विश्वास उठ जाता है. एक लोकतांत्रिक समाज में ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं की जा सकती जहां सुरक्षा के जिम्मेदार लोग ही डर और धमकी के एजेंट बन जाएं.'
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है और वह मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकता.
अदालत के सख्त निर्देश
कोर्ट ने इस मामले में प्रशासनिक उदासीनता को आड़े हाथों लेते हुए बीकानेर एसपी को निर्देश दिया है कि वे खतरे का तत्काल आकलन करें और याचिकाकर्ताओं व उनके परिवार को निरंतर सुरक्षा प्रदान करें. इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट ने DGP को सौंपी है. इसके साथ ही कोर्ट ने गृह सचिव और डीजीपी राजस्थान को इस पूरे प्रकरण की जांच एक वरिष्ठ अधिकारी से कराने और उचित आदेश पारित करने के निर्देश हैं. कोर्ट ने साफ कहा है कि जांच के दौरान आरोपी अधिकारी संजय बोथरा को पीड़ितों और गवाहों से पूरी तरह दूर रखा जाए ताकि ताकि जांच प्रभावित न हो. यदि पीड़ितों को कोई नुकसान होता है, तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी.
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