दौसा: बुआ के भात में गया था युवक, 11 साल बाद भरतपुर आश्रम में मिला; गांव में फूल-मालाओं से हुआ भव्य स्वागत 

राजस्थान में दौसा जिले के शाहजहांनपुरा गांव में 11 साल पहले लापता हुआ युवक सुरेश मीणा आखिरकार अपने परिवार के पास लौट आया. भरतपुर के बाल आश्रम से मिली जानकारी के बाद परिवार उसे घर लाया तो पूरे गांव में जश्न मनाया गया.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
दौसा जिले के शाहजहांनपुरा गांव में 11 साल पहले लापता हुआ युवक मिल गया.

Rajasthan News: राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र के रामगढ़ पचवारा उपखंड के गांव शाहजहांनपुरा में शुक्रवार को उस समय भावुक और खुशी भरा माहौल बन गया जब करीब 11 साल से लापता युवक सुरेश कुमार मीणा अपने घर लौट आया. लंबे इंतजार के बाद बेटे को सामने देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं और पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल बन गया.

परिवार के अनुसार 30 वर्षीय सुरेश कुमार मीणा पुत्र रामप्रताप मीणा 18 मई 2015 को श्यालावास गांव में एक शादी समारोह में गया था. वहां बुआजी के भात भरने का कार्यक्रम चल रहा था. इसी दौरान वह पानी पीने की बात कहकर बाहर निकला लेकिन फिर वापस नहीं लौटा. अचानक उसके गायब हो जाने से परिवार और रिश्तेदारों में हड़कंप मच गया.

डेढ़ महीने तक तलाश के बाद दर्ज करवाई गुमशुदगी

सुरेश के परिजनों ने करीब डेढ़ महीने तक आसपास के कई गांवों और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा. आखिरकार पिता रामप्रताप मीणा ने दौसा के सदर थाना में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. इसके बाद भी परिवार ने कई सालों तक अपने स्तर पर खोज जारी रखी लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

छोटे भाई की कोशिशों से मिला सुराग

सुरेश के छोटे भाई रोशन मीणा लगातार बाल आश्रमों और संस्थाओं में उसकी जानकारी भेजकर तलाश करते रहे. 5 मार्च 2026 को उन्होंने सुरेश की फोटो भरतपुर के अपना घर बाल आश्रम को भेजी. वहीं से सूचना मिली कि वहां एक युवक है जिसकी पहचान सुरेश से मिलती है. इसके बाद परिवार के लोग भरतपुर पहुंचे और पुष्टि होने पर उसे अपने साथ गांव ले आए.

Advertisement

डीजे के साथ जुलूस निकालकर गांव लाए सुरेश

सुरेश के चाचा मोतीलाल मीणा ने बताया कि जैसे ही गांव में उसके मिलने की खबर पहुंची तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार जब उसे लेकर पीपली पातलवास पहुंचा तो हजारों ग्रामीण वहां जमा हो गए. करीब चार किलोमीटर का सफर डीजे और जुलूस के साथ तय किया गया. रास्ते भर लोगों ने फूल मालाओं से उसका स्वागत किया और पूरा गांव जश्न में झूम उठा.

मंदिर में दर्शन कर जताई कृतज्ञता

गांव पहुंचने के बाद सुरेश सबसे पहले भेरूजी महाराज और कुलदेवी खलकाई माता के मंदिर पहुंचा और दर्शन कर आशीर्वाद लिया. इस दौरान महिलाएं और पुरुष गुलाल लगाकर नाचते गाते हुए उसे घर तक लेकर पहुंचे.

Advertisement

सुरेश के परिवार में दो भाई और एक बहन हैं. उसके पिता रामप्रताप मीणा ढोलावास ग्राम पंचायत से सरपंच का चुनाव भी लड़ चुके हैं. बेटे की 11 साल बाद घर वापसी से परिवार और पूरे गांव में खुशी और भावुकता का माहौल है.

यह भी पढ़ें- AIIMS से पढ़ाई, अब UPSC में नंबर-1: अनुज अग्निहोत्री ने कोटा की पढ़ाई और अनुशासन की बताई बड़ी भूमिका

Advertisement