डीडवाना की अनोखी होली, जहां हाकिम की पीठ पर पड़ती है पहली 'डोलची', तब उड़ता है अबीर गुलाल; देखें Video

राजस्थान के डीडवाना में धुलंडी पर 'डोलची होली' की परंपरा ब्रिटिश काल से पहले निभाई जा रही है. इसमें SDM (हाकिम) की पीठ पर पहली डोलची (लोहे की छोटी सी डोलची) मारकर खेल की शुरुआत होती है. लोहे की डोलची से पानी के प्रहार की यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है.

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डोलचीमार होली खेलते हुए लोग
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Didwana DolchiMaar Holi: होली का त्योहार पूरे देश में अलग-अलग अंदाज़ में मनाया जा रहा हैं, लेकिन इन सबके बीच राजस्थान के डीडवाना की होली सबसे अलग मानी जाती है. यहां धुलण्डी के दिन रंग और गुलाल नहीं, बल्कि पानी से भरी लोहे की डोलची से होली खेली जाती है. इस परंपरा को  यहां 'डोलची होली' या 'डोलची गैर' कहा जाता है.

उपखंड अधिकारी की पीठ पर पड़ी है पहली डोलची की मार

इस होली की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत उपखंड अधिकारी यानी हाकम की पीठ पर पहली डोलची मारकर की जाती है. इसके बाद फिर पूरा शहर इस अनोखी होली में शामिल हो जाता है. इसी कारण इसे “हाकम की गैर” या “राजकीय गैर” भी कहा जाता है.इस डोलचीमार होली को मनाने के लिए लोग एकत्रित होकर कचहरी परिसर एक्ट्ठा होते हैं.

देखें डोलचीमार होली

 ब्रिटिश काल से भी पहले की डोलचीमार होली

लोकमान्यताओं के अनुसार यह परंपरा ब्रिटिश काल से भी पहले की है. कहा जाता है कि होली जैसे उल्लासपूर्ण पर्व पर शासन और जनता के बीच सौहार्द और सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से इस अनूठी परंपरा की नींव रखी गई.

कैसे खेली जाती है डोलची होली

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इस डोलची होली में बड़े-बड़े कड़ाइयों में सादा पानी भरा जाता है. जिसमें रंग या गुलाल का प्रयोग नहीं किया जाता है. बल्कि लोहे से बनी डोलची में सादा पानी भरकर मारने वाला अपना साथी की पीठ के पीछे खड़े होकर उस पर पूरी ताकत से इसे मारते है. जब डोलची से भरे पानी का प्रहार पड़ता है तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है.जो परंपरा के प्रति आस्था और जोश का प्रतीक है.

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