होलिका दहन के समय पर मतभेद... क्या है सही मुहूर्त, विद्वानों ने दी सही जानकारी

होली दहन पर मतभेद है पर विद्वानों ने कहा भद्रा काल में दहन निषिद्ध है. जिसे वासुदेव धर्म सागर पंचांग में 6 फरवरी सुबह 4 बजकर 6 मिनट बताता है. 

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

Rajasthan News: इस समय होली दहन को लेकर काफी चर्चा हो रही है क्योंकि समय और तिथि पर विद्वानों की राय अलग अलग है. प्रेस वार्ता में विद्वानों ने कहा कि आम लोग सही जानकारी लें.

शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन बिल्कुल निषिद्ध माना गया है. अगर इस काल में दहन किया जाए तो शास्त्रों का उल्लंघन होता है. इसलिए विद्वान सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं. भद्रा काल का समय जानना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि त्योहार सही रीति से मनाया जा सके.  

पंचांगों में अलग मत

वासुदेव धर्म सागर पंचांग बताता है कि 3 फरवरी सुबह 4 बजकर 6 मिनट पर होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त है. वहीं निर्णय सागर पंचांग में भद्रा काल के समाप्त होने के बाद ही दहन करने की बात कही गई है. इस तरह के मतभेद से लोगों को सही समय चुनने में दिक्कत हो रही है. कई लोग इस उलझन में हैं कि किस पंचांग को मानें.  

अफवाहों से सावधान

आज सोशल मीडिया पर बहुत सी गलत खबरें फैल रही हैं जो होलिका दहन के समय के बारे में भ्रम पैदा कर रही हैं. बीकानेर के विद्वानों ने साफ कहा कि इन अफवाहों पर भरोसा न करें. वे कहते हैं कि सोशल मीडिया की हर पोस्ट सही नहीं होती. प्रमाणिक स्रोत ही विश्वसनीय होते हैं.  

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अपील और सलाह

विद्वानों की तरफ से आम जनता के लिए अपील जारी की गई है कि वे प्रमाणिक पंचांग देखें और अपने क्षेत्र के विद्वानों से सलाह लें. इससे न सिर्फ परंपरा का पालन होगा बल्कि शास्त्रों का सम्मान भी बना रहेगा. सही मुहूर्त पर दहन करने से होली का त्योहार और भी यादगार बन जाएगा. सभी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए.

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