Dungarpur holi Unique tradition: राजस्थान में सोमवार को हेलिका दहन के बाद अब लोग होली की तैयारी में जुट गए हैं. लेकिन डूंगरपुर जिले के कोकापुर गांव में हेलिका दहन के दूसरे दिन एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने लोगों की सांसें रोक दीं. लोग जली हुई लकड़ियों के जलते अंगारों पर बेखौफ चल रहे थे.
होलिका के दहकते अंगारों पर नंगे पैर चले
आदिवासी बहुल डूंगरपुर में पुरानी परंपरा के अनुसार होलिका दहन (सोमवार) के दिन सबसे पहले होलिका माता की पूजा की गई. फिर अगले दिन यानी मंगलवार (3 मार्च) सुबह गांव के लोग ढोल कुंडी के साथ होली चौक पर इकट्ठा हुए. इसके बाद लोगों ने हनुमान और इलाके में बने मंदिर में दर्शन-पूजन किया. दर्शन-पूजन के बाद लोग ढोल कुंडी की थाप पर गैर बजाते हुए पास के होली चौक पहुंचे.उसके बाद सबसे पहले होलिका माता की पूजा की गई और फिरगांव के युवा और बुजुर्ग सालों की परंपरा को कायम रखते हुए होलिका के दहकते अंगारों पर नंगे पैर गुजरने लगे. शांति और खुशहाली की प्रार्थना की. साथ ही होली माता के जयकारे लगाते रहे.
देखें नंगे पैर से दहकते अंगारों पर चलते हुए लोग
पुरानी मान्यताओं को मानते आ रहे है लोग
एक गांव के ग्रामीण ने बताया कि गांव की जलती होली के अंगारों पर नंगे पर चलकर पुरानी मान्यताओं को पूरा किया जाता है. इसे लेकर गांव में मान्यता है कि होलिका दहन के बाद धधकते अंगारों पर चलने से गांव में कोई भी आपदा नहीं आती है. गांव वासियों का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है. इसी परंपरा को देखने लिए आसपास के कई गांव के लोगों यहां कोकापुर हर साल पहुंचते है.
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