Khatu Shyam Holi Dahan Timing: राजस्थान के सीकर के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी में आज ( सोमवार) होली का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. लक्खी मेले के बाद बाबा के दरबार में फाल्गुन की मस्ती छाई हुई है, लेकिन इस बार खगोलीय घटना यानी चंद्र ग्रहण (Chandra grahan 2026) के कारण मंदिर की व्यवस्थाओं और दर्शन के समय में बड़ा बदलाव किया गया है.
देर रात 2 बजे होगा होलिका दहन
खाटूधाम की परंपरा के अनुसार, इस साल होलिका दहन (Holika Dahan 2026) का कार्यक्रम आज यानी सोमवार ( 2 March) देर रात 2 बजे संपन्न होगा. भक्त प्रह्लाद की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप जलने वाली इस अग्नि के साक्षी बनने के लिए हज़ारों श्रद्धालु खाटू नगरी में मौजूद हैं.
ग्रहण के कारण दिन भर बंद रहेंगे मंदिर के पट
2 मार्च देर रात होलिका दहन के बाद 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को मंदिर के कपाट साल 2026 में लगने वाला पहले चंद्र ग्रहण के कारण बाबा श्याम के भक्तों के लिए बंद रहेंगे. मंदिर कमेटी के अनुसार, सुबह की मंगला आरती के तुरंत बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे. इसके बाद चंद्र ग्रहण का सूतक काल (Sutak kaal) प्रभावी होने के कारण दिन भर मंदिर के पट बंद रहेंगे. इस दौरान किसी भी प्रकार की विशेष पूजा या दर्शन की अनुमति नहीं होगी. इसके बाद ग्रहण समाप्त होने पर मंदिर परिसर का शुद्धिकरण और विशेष अनुष्ठान करने के बाद बाबा श्याम के दर्शनों का सुख भक्तों को मिलेगा.
सूतक में क्यों नही किए जाते भगवान के दर्शन
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'सूतक' (Sutak) उस समय को कहा जाता है, जो ग्रहण (सूर्य या चंद्र ग्रहण) लगने से कुछ घंटे पहले शुरू होता है. इस अवधि को आध्यात्मिक दृष्टि से 'अशुद्ध' माना जाता है, यही कारण है कि इस दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की मूर्तियों का स्पर्श या दर्शन वर्जित होता है. इसके अलावा पौराणिक कथाओं के अनुसार, ग्रहण वह समय है जब सूर्य या चंद्रमा पर संकट आता है (राहु-केतु द्वारा ग्रसा जाना) और भगवान को अत्यधिक पीड़ा होती है. ऐसे में भक्त अपने आराध्य को संकट की स्थिति में नहीं देखना चाहते. वैसे ही ग्रहण के दौरान भगवान को भी 'विश्राम' की स्थिति में माना जाता है.
चंद्र ग्रहण में सूतक काल का समय क्या है?
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को यानी कल लगने वाला है. यह एक खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा. यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा.यह चंद्र ग्रहण राजस्थान सहित भारत के अन्य राज्यों में दिखाई देने वाला है.चंद्र ग्रहण दोपहर के समय शुरू होगा और शाम को समाप्त होगा. इस ग्रहण के शुरू होने से 9 घंटे पहले देश में सूतक काल लग जाएगा. इसी आधार पर 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रभावी हो जाएगा. ग्रहण काल के साथ ही सूतक समाप्त होगा. इसमें शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.
कब होंगे दर्शन?
2 मार्च को देर रात दो बजे होलिका दहन के 4 घंटे बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद हो जाएंगे. जो अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 (बुधवार) होली परमंगला आरती के बाद सुबह 5:30 बजे से खोले जाएंगे. इस दौरान श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे और धुलंडी का उत्सव मना सकेंगे. इसके बाद फिर 4 मार्च को रात 10 बजे से अगले दिन 5 मार्च को शाम 5 बजे तक विशेष सेवा पूजा तिलक के लिए मंदिर के कपाट 8 घंटों के लिए बंद कर दिए जाएंगे.
दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं के लिए विशेष सलाह
प्रशासन और मंदिर कमेटी ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के समय में हुए इस बदलाव को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा का प्लान बनाएं। 3 मार्च को मंदिर बंद रहने के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.