"बांग्लादेश में बाहरी ताकते भी काम कर रही हैं". कैलाश सत्यार्थी बोले- समाज के ल‍िए ठीक नहीं 

कैलाश सत्यार्थी ने कहा क‍ि एक दिन ऐसा दौर आ जाएगा कि इंसानों में करुणा को नापने के लिए भी कोई ऐप आ जाएगा. वह आपको बताएगा कि सामने वाले इंसान में आपके लिए कितना कंपेशन रखता है. 

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोलते कैलाश सत्यार्थी.

नोबल पीस प्राइस विजेता कैलाश सत्यार्थी अपनी नई किताब 'करुणा' के विषय पर बात करने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बताया क‍ि समाज में करुणा बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा क‍ि बांग्लादेश में जो हो रहा, उसमें बाहरी ताकतें भी काम कर रही हैं, यह समाज के लिए ठीक नहीं है.

"करुण हम सभी के अंदर है" 

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर हो रही सुनवाई को लेकर कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा हम सभी के अंदर है. यह केवल इंसानों के लिए नहीं होनी चाहिए, हमें सभी के साथ करुणा रखने की जरूरत है. 

"कॉर्पोरेट में भी करुणामई लीडरशिप की जरूरत"

उन्होंने कहा क‍ि आमतौर पर हम सभी करुणा के साथ हैं, लेकिन हमारे बीच में प्रतिस्पर्धा की भावना की जो आक्रामकता है. सामाजिक आक्रामकता है. मैं कहता हूं हमें एक कंपैशन ज्यूडिशियरी की आवश्यकता है. हमें एक करुणामई न्यायपालिका, राजनीति, मीडिया की जरूरत है. यहां तक कि हमें कॉर्पोरेट सेक्टर में भी करुणामई लीडरशिप की भी जरूरत है. 

"इकॉनमी के लिए भी ठीक नहीं है" 

उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति पर बोला कि बांग्लादेश अकेला देश नहीं है. उस देश में जो हो रहा है, केवल एक व्यक्ति की बात नहीं हैं. वहां जो भी हो रहा है, वह समाज, इंसानों और इकॉनमी के लिए भी ठीक नहीं है. इस सबमे उस देश के बाहर भी कुछ ताकतें हैं, जो काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि नोबल विजेता मोहम्मद यूनुस के ऊपर ही केवल यह निर्भर नहीं है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: महामंडलेश्‍वर संत महेश्‍वरानंद की जान को खतरा बताया, व‍िदेशी सेव‍िका ने कराया केस