पाली के नेशनल हाईवे-162 पर स्थित ओम विश्वदीप गुरुकुल आश्रम के महामंडलेश्वर संत महेश्वरानंद को जान का खतरा बताया है. संत की विदेशी निजी सहायिका उमापुरी ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराया. आश्रम की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों पर षड्यंत्रपूर्वक अंगूठा लगवाने का आरोप लगाया है.
आश्रम में रहती है उमापुरी
ऑस्ट्रिया की रहने वाली उमापुरी ओम आश्रम में रहती है. उसने 13 जनवरी को पाली के समाजसेवी नेमीचंद चोपड़ा और आश्रम के संत फूलपुरी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. रिपोर्ट में बताया कि संत महेश्वरानंद वर्तमान में बीमार हैं, और वे कई धर्मार्थ ट्रस्टों के संरक्षक हैं. दोनों ने साजिश रचकर उन्हें खाने पर बुलाया, और आश्रम की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों पर जबरन अंगूठा लगवा लिया.
12 जनवरी को लंच पर गए थे
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को स्वामी फूलपुरी, महामंडलेश्वर महेश्वरानंद को लंच के लिए शहर के मानपुरा भाकरी स्थित नेमीचंद चोपड़ा के घर लेकर गए थे. इस दौरान संत की निजी सहायिका उमापुरी और मुख्य सहायक जोल्टन ओलाह भी उनके साथ मौजूद थे.
सभी लोग रिसेप्शन एरिया में बैठे, बाद में डायनिंग एरिया में भोजन के लिए गए. इसी दौरान नेमीचंद चोपड़ा और संत फूलपुरी ने उमापुरी और जोल्टन ओलाह को बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन दोनों ने इनकार कर दिया. बाद में विरोध बढ़ने पर वे लॉबी में आकर खड़े हो गए.
कांच से देख रही थी गतिविधि
रिपोर्ट में उमापुरी ने बताया कि लॉबी में खड़े होकर कांच के जरिए डायनिंग एरिया में हो रही गतिविधि देख रही थी. इसी दौरान एक महिला वहां पहुंची, जिस पर वकील होने का शक जताया गया है. आरोप है कि जैसे ही यह पता चला कि अंदर की गतिविधियां देखी जा रही है, कांच के सामने लोग खड़े हो गए.
अंगूठे पर नीली स्याही लगी थी
कुछ देर बाद अंदर जाने पर देखा गया कि संत महेश्वरानंद के अंगूठे पर नीली स्याही लगी थी, जिसे नेमीचंद चोपड़ा साफ करने का प्रयास कर रहे थे. इसी दौरान वहां मौजूद महिला ने कुछ दस्तावेज बैग में रखे और वहां से निकल गई. जब पूछा गया कि किन दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाया गया है, तो टालमटोल की गई. उमापुरी ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाए जाने का भी दावा किया है.
इस पूरी घटना को लेकर आश्रम पहुंचे और सहायिका उमापूरी से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने न तो फोन अटेंड किया और न सामने आईं.
"गुरुजी ने वसीयत वियना में बना रखी है"
महेश्वरानंद के शिष्य फूलपुरी ने आरोप पर बताया, "गुरुजी के साथ पाली नेमीचंद चोपड़ा के निवास पर भोजन प्रसादी का कार्यक्रम था. वहां गए थे. गुरुजी के निजी वकील जो सुप्रीमकोर्ट के हैं, उनके जूनियर कुछ बैंक के कागजों पर साइन के लिए लेकर आए, लेकिन गुरुजी की तबियत ठीक नहीं रहती. गुरुजी ने पहले ही अपनी वसीयत वियना में बना रखी है, जिसमें मुझे और अवतारपुरी को उत्तराधिकारी बनाया है. दस्तावेजों को लेकर लगाए आरोप झूठे हैं. ये सेविका न तो शिष्य है, न कार्यकारिणी में कोई सदस्य है. गुरु जी के कहे अनुसार ही आश्रम में काम हो रहा है, लेकिन विदेशी लोग विरोध कर रहे हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है."
"हमने किसी से बदसलूकी नहीं की"
समाजसेवी नेमीचंद चोपड़ा आरोप पर कहा, "मैं पिछले 40 साल से गुरुजी से जुड़ा हूं. घर पर गुरुजी पधारे थे. सुप्रीम कोर्ट के गुरुजी के वकील का फोन आया कि कुछ कागजों पर गुरुजी के साइन कराने हैं, और आपके यहां आए हुए हैं. मेरी जूनियर आपके पास जोधपुर से पाली आ रही हैं. खाना खाने के बाद साइन करवा देना. जूनियर कागज लेकर आई. गुरुजी साइन नहीं कर सकते, और न बोल सकते हैं. तबीयत खराब होने से तो अंगूठे पर स्याही लगाई थी. उमापुरी आई और नो नो बोलते हुए जोर जोर से चिल्लाने लगी. मैं नहीं समझ सका. जूनियर बिना साइन अंगूठे के चली गई. हमने किसी को बाहर नहीं निकाला, और ना बदसलूकी की, जो आरोप लगाए गए हैं, वो गलत है. जांच में समाने आ जाएगा."
संपत्तियों पर अवैध कब्जे की आंशका
उमापुरी ने रिपोर्ट में आरोप लगाया कि एक मौन आध्यात्मिक गुरु से बिना दस्तावेज पढ़े या समझाए, अनुचित प्रभाव और दबाव बनाकर अंगूठे के निशान लिए गए. आशंका जताई गई है कि इन दस्तावेजों का उद्देश्य संत महेश्वरानंद के ट्रस्टों, धन और संपत्तियों पर अवैध कब्जा करना हो सकता है.
उत्तराधिकारी को भी खतरा
उमापुरी ने महामंडलेश्वर संत महेश्वरानंद के साथ-साथ उनके उत्तराधिकारी स्वामी अवतारपुरी की शारीरिक सुरक्षा को भी खतरा बताया है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संत महेश्वरानंद वर्तमान में मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम नहीं हैं, ऐसे में उनके अंगूठे के निशानों का दुरुपयोग होने की आशंका है. इसके साथ ही नेमीचंद चोपड़ा के घर के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने की मांग भी की गई है.
पुलिस ने अभी कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. फिलहाल मामला पुलिस ने दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी, लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने से पुलिस प्रशासन भी हर कदम सावधानी से उठा रही है.
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