नोबल पीस प्राइस विजेता कैलाश सत्यार्थी अपनी नई किताब 'करुणा' के विषय पर बात करने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पहुंचे. इस दौरान उन्होंने बताया कि समाज में करुणा बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो हो रहा, उसमें बाहरी ताकतें भी काम कर रही हैं, यह समाज के लिए ठीक नहीं है.
"करुण हम सभी के अंदर है"
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर हो रही सुनवाई को लेकर कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा हम सभी के अंदर है. यह केवल इंसानों के लिए नहीं होनी चाहिए, हमें सभी के साथ करुणा रखने की जरूरत है.
"कॉर्पोरेट में भी करुणामई लीडरशिप की जरूरत"
उन्होंने कहा कि आमतौर पर हम सभी करुणा के साथ हैं, लेकिन हमारे बीच में प्रतिस्पर्धा की भावना की जो आक्रामकता है. सामाजिक आक्रामकता है. मैं कहता हूं हमें एक कंपैशन ज्यूडिशियरी की आवश्यकता है. हमें एक करुणामई न्यायपालिका, राजनीति, मीडिया की जरूरत है. यहां तक कि हमें कॉर्पोरेट सेक्टर में भी करुणामई लीडरशिप की भी जरूरत है.
"इकॉनमी के लिए भी ठीक नहीं है"
उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति पर बोला कि बांग्लादेश अकेला देश नहीं है. उस देश में जो हो रहा है, केवल एक व्यक्ति की बात नहीं हैं. वहां जो भी हो रहा है, वह समाज, इंसानों और इकॉनमी के लिए भी ठीक नहीं है. इस सबमे उस देश के बाहर भी कुछ ताकतें हैं, जो काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि नोबल विजेता मोहम्मद यूनुस के ऊपर ही केवल यह निर्भर नहीं है.
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