कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती पांच प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में आज नया मोड़ आ गया. प्रसूताओं और उनके परिजनों ने दो दिन पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. यह समयसीमा समाप्त होने के बाद अब उन्होंने डायलिसिस कराने से इंकार कर दिया. कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले करीब 70 दिनों से भर्ती किडनी फेलियर से जूझ रही पांच प्रसूता महिलाएं और उनके परिजन किडनी ट्रांसप्लांट की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि 4 मई से 8 मई 2026 के बीच वे प्रसव के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल आई थीं. इसके बाद ही इलाज के दौरान उनकी दोनों किडनी फेल हो गईं. हालांकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि पांचों मरीजों का इलाज सही तरह से हो रहा है.
बंद कराया डायलिसिस
कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पिछले 70 दिनों से अधिक समय से पांचों प्रसूताओं का इलाज चल रहा है. आज प्रसूता पिंकी और आरती का डायलिसिस होना था, लेकिन उन्होंने डायलिसिस नहीं कराया. दोनों महिलाएं अपने परिजनों के साथ अस्पताल के बाहर आ गईं. प्रसूताओं और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की है.
प्रसूताओं का कहना है कि पिछले दो महीने से ज्यादा समय से उन्हें डायलिसिस के सहारे जीवन बचाए रखना पड़ रहा है. लगातार डायलिसिस की प्रक्रिया बेहद पीड़ादायक है और शारीरिक व मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से उनका परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा है.

प्रसूताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है
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अस्पताल प्रशासन की सफाई
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी पांचों प्रसूताओं का इलाज लगातार जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है. उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों में पहले करीब तीन महीने तक उपचार के जरिए किडनी की कार्यक्षमता सुधारने का प्रयास किया जाता है. इसके बाद ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पर निर्णय लेती है.
डॉ. जैन ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि मरीजों या परिजनों को किसी भी प्रकार की समस्या है तो वे अस्पताल प्रशासन को अवगत कराएं, उसका समाधान किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि पांचों मरीजों की स्थिति अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने योग्य है. परिजन चाहें तो मरीजों को घर ले जाकर जरूरत के अनुसार डायलिसिस के लिए अस्पताल ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से सभी प्रसूताओं का निशुल्क इलाज किया जा रहा है और मरीजों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं डाला जा रहा.
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