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हनुमानगढ़ किसान आंदोलन: जब बैरिकेड्स तोड़ पटरी पर पहुंच गए अन्नदाता, जानिए किन शर्तों पर समाप्त हुआ धरना

राजस्थान के हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में गेहूं खरीद और बारदाने की मांग को लेकर किसानों ने बैरिकेड्स तोड़ रेलवे ट्रैक जाम किया. जिला कलेक्टर खुशाल यादव और एसपी नरेंद्र मीना से वार्ता के बाद सहमति बनी.

हनुमानगढ़ किसान आंदोलन: जब बैरिकेड्स तोड़ पटरी पर पहुंच गए अन्नदाता, जानिए किन शर्तों पर समाप्त हुआ धरना
हनुमानगढ़ किसान आंदोलन
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राजस्थान के हनुमानगढ़ के  पीलीबंगा में  समर्थन मूल्य  पर गेहूं खरीद की अव्यवस्थाओं को लेकर शुक्रवार को किसानों का आक्रोश फूट पड़ा. सरकारी खरीद की समय सीमा बढ़ाने और बारदाने की मांग को लेकर माकपा कार्यकर्ताओं  और किसानों का पूर्व घोषित आंदोलन उग्र हो गया.आक्रोशित किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए कड़े बैरिकेड्स को तोड़ दिया और सीधे रेलवे ट्रैक पर जाकर धरने पर बैठ गए. 

 500 पुलिसकर्मियों का जाप्ता, पटरी पर हाई-वोल्टेज ड्रामा

किसानों के अचानक रेलवे ट्रैक जाम करने से प्रशासन में हड़कंप मच गया और मौके पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई. हालात देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बैरिकेटिंग के साथ ही करीब 500 पुलिसकर्मियों का भारी जाप्ता तैनात कर रखा था. जैसे ही किसान पटरी पर बैठे, जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) नरेंद्र मीना और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए मुस्तैदी से किसानों को समझाया और ट्रैक को खाली करवाकर रेल यातायात सुचारू करवाया. रेलवे ट्रैक से हटने के बाद किसान पुनः एसडीएम कार्यालय के सामने अपने धरना स्थल पर लौट आए.

कलेक्टर-एसपी की मैराथन वार्ता, इन मांगों पर बनी सहमति

आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए जिला प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आया. पहले दौर की वार्ता अतिरिक्त जिला कलेक्टर  उम्मेदी लाल मीणा, एएसपी अरविंद विश्नोई और एसपी गीता चौधरी के साथ हुई.  इसके बाद गतिरोध पूरी तरह खत्म करने के लिए दूसरे दौर की मैराथन बैठक हुई, जिसमें जिला कलेक्टर खुशाल यादव और एसपी नरेंद्र मीना खुद शामिल रहे.

प्रशासन और किसानों के बीच मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर सहमति बनी

 अधिकारियों ने मंडियों में गेहूं की तुलाई के लिए तुरंत और पर्याप्त मात्रा में बारदाना (बोरियां) उपलब्ध करवाने का लिखित/मौखिक भरोसा दिया. गेहूं खरीद की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाने की किसानों की मांग पर जिला कलेक्टर खुशाल यादव ने आश्वासन दिया कि वे इस संबंध में तुरंत राज्य सरकार को सिफारिशी पत्र लिखेंगे.

मांगें पूरी न होने पर 10 जून को फिर बड़े आंदोलन की चेतावनी

प्रशासन के सकारात्मक रुख और ठोस आश्वासन के बाद किसान नेताओं ने फिलहाल अपने उग्र आंदोलन को स्थगित करने का फैसला किया है। हालांकि, किसान प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तय समय के भीतर मंडियों में बारदाना नहीं पहुंचा और खरीद की तारीख नहीं बढ़ाई गई, तो 10 जून से दोबारा इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा.

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