राजस्थान हाई कोर्ट ने आज प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव के बारे में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जुलाई तक चुनाव करवाने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने साथ ही ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं. प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोजित करने में इस रिपोर्ट को सौंपने में हुई देरी को भी एक बड़ी वजह बताया था. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में बीते 11 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे आज सुनाया गया. हाई कोर्ट के आज के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि अदालत ने पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव करवाने का निर्देश दिया था. लेकिन राज्य सरकार ने इसमें असमर्थता जताते हुए दिसंबर 2026 तक का समय मांगा था.
चुनाव आयोग को दिया 20 जून से प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश
एडवोकेट पीसी देवंदा ने अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए कहा,"पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति के बीच 11 मई को माननीय उच्च न्यायालय ने चुनाव की समयसीमा बढ़ाए जाने के राज्य सरकार के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं और फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि ये चुनाव 31 जुलाई तक करवाने आवश्यक हैं. इससे पहले 20 जून तक ओबीसी आयोग तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा और उसके बाद चुनाव आयोग चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर देगा."
राज्य सरकार के लिए राहत भरा फैसला
हाई कोर्ट ने हालांकि राजस्थान सरकार के दिसंबर तक चुनाव करवाने के आग्रह को स्वीकार नहीं किया. लेकिन, इसके बावजूद अदालत के फैसले को राज्य सरकार के लिए राहत माना जा रहा है क्योंकि अदालत से राज्य सरकार को अवमानना नोटिस जारी करने की भी मांग की गई थी. याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि 15 अप्रैल तक चुनाव नहीं करवाने के अदालत के आदेश का पालन नहीं करने से अदालत की अवमानना हुई है.
हालांकि याचिकार्ता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अदालत के फैसले के बाद फिर आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार हार के डर की वजह से चुनाव करवाने से कतरा रही है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव करा लिए जाएं. हालांकि, भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर इस समय-सीमा में चुनाव कराने को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और दिसंबर 2026 तक का समय मांग लिया. सरकार ने चुनाव टालने के पीछे कोर्ट के सामने प्रशासनिक और व्यावहारिक दलीलों की पूरी लिस्ट रखी थी:-
- सरकार का तर्क है कि मई-जून में राजस्थान में भयंकर लू (Heatwave) चलती है, जबकि जुलाई से सितंबर तक भारी बारिश और कृषि कार्यों में ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहते हैं.
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनेंगे, जिनके लिए 3.4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है.
- महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर दो अलग-अलग फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय करने में देरी हुई.