यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम की अपील पर आज हाई कोर्ट सुनाएगा बड़ा फैसला, सजा के ख‍िलाफ फैसला सुरक्षित 

नाबाल‍िग से यौन उत्‍पीड़न में हुई सजा के ख‍िलाफ आसाराम और सह-आरोपियों ने हाई कोर्ट में अपील की थी. ज‍िस पर सुनवाई पूरी हो गई.  

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यौन उत्पीड़न मामले में सजा के खिलाफ आसाराम ने हाई कोर्ट में अपील की थी.

राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता आसाराम, सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद की ओर से दायर अपीलों पर आज महत्वपूर्ण निर्णय सुनाएगी. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की बेंच ने सभी पक्षों की लंबी बहस और दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.  

20 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा लिया  

वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत, अधिवक्ता दीपक मेनारिया और यशपाल सिंह राजपुरोहित अपीलकर्ताओं की ओर से पेश हुए. अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अधिवक्ता पी.सी. सोलंकी पीड़िता की ओर से पेश हुए. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने 20 अप्रैल 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

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2018 को आसाराम को हुई थी सजा  

25 अप्रैल 2018 को विशेष न्यायालय ने नाबालिग बलात्कार मामले में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी. इस फैसले के ख‍िलाफ तीनों ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील दायर की, जिस पर आज फैसला आएगा. 

पूरा घटनाक्रम 

  • 21 अगस्त 2013 को जोधपुर के महिला पुलिस स्टेशन में नाबालिग से बलात्कार के मामले में FIR हुई.
  • 31 अगस्त 2013 को इंदौर के एक आश्रम से गिरफ्तारी की गई. 
  • 6 नवंबर 2013 को 1021 पृष्ठों की आरोपपत्र दाखिल की गई. 
  • 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई. 
  • जनवरी 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ पहली अंतरिम चिकित्सा जमानत दी. 
  • 27 अगस्त 2025 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी. 
  • 29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने छह महीने की चिकित्सा जमानत दी. 
  • 8 दिसंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करने की याचिका खारिज कर दी और उच्च न्यायालय को तीन महीने के भीतर अपील पर फैसला करने का निर्देश दिया. 
  • 15 अप्रैल 2026 को चिकित्सा कारणों से जमानत अवधि बढ़ाने के लिए एक आवेदन दायर किया गया. 
  • 16 अप्रैल 2026 को न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. 
  • 17 अप्रैल 2026 को सजा स्थगित करने से संबंधित याचिका पर आसाराम पक्ष की दलीलें पूरी हुईं. 
  • 20 अप्रैल 2026 को पीड़ित पक्ष की दलीलें समाप्त हुईं और फैसला सुरक्षित रख लिया गया. 

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