जयपुर में करीब डेढ़ लाख आवारा कुत्ते नगर निगम के लिए चुनौती, कैसे होगा SC के आदेश का पालन... नहीं है संसाधन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज़ टीकाकरण के बाद उन्हें वापस छोड़ना होगा. वहीं राजधानी जयपुर में डेढ़ लाख आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम और संसाधनों की कमी चुनौती बन रही है.

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जयपुर में करीब 1.5 लाख कुत्ते बन रहे चुनौती.

Rajasthan News: देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था. जिसमें कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में नहीं रखा जाएगा. उनकी नसबंदी और रेबीज़ का टीका लगाने के बाद उन्हें उसी जगह छोड़ना होगा जहां से पकड़ा गया. राजस्थान सरकार ने इस आदेश को लागू करने के लिए सभी नगर निगमों और पालिकाओं को सख्त निर्देश दिए हैं. लेकिन जयपुर में यह काम आसान नहीं दिख रहा.

जयपुर में डेढ़ लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते

जयपुर में अनुमानित डेढ़ लाख आवारा कुत्ते हैं. यह संख्या शहर के लिए बड़ी समस्या बन रही है. हेरिटेज नगर निगम ने अभी तक कुत्तों को पकड़ने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की है. वहीं ग्रेटर नगर निगम के पास कर्मचारी और संसाधनों की भारी कमी है. ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर नसबंदी और टीकाकरण का काम कैसे पूरा होगा यह बड़ा सवाल है.

शेल्टर होम की कमी

जयपुर में शेल्टर होम की स्थिति भी चिंताजनक है. शहर में सिर्फ दो शेल्टर होम हैं जिनमें केवल 150 कुत्तों को रखने की जगह है. जयसिंह पुरा खोरល, एक शेल्टर होम बन रहा है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को संभालना मुश्किल हो रहा है.

नगर निगम के सामने चुनौतियां

नगर निगम की टीमें आक्रामक कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर रही हैं. लेकिन कोर्ट के आदेश के मुताबिक हर कुत्ते का रिकॉर्ड रखना और उन्हें वापस उनके इलाके में छोड़ना जरूरी है. इसके लिए CCTV निगरानी, मेडिकल स्टाफ, वैन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत है जो अभी नाकाफी हैं.

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